संकट के समय कम हो सकती है PF कटौती, तीन महीने तक राहत का प्रावधान
महामारी या राष्ट्रीय आपदा में सरकार कर सकेगी योगदान में बदलाव; हाथ में बढ़ेगा वेतन, लेकिन रिटायरमेंट बचत पर पड़ेगा असर
नई दिल्ली। नौकरीपेशा लोगों के वेतन और रिटायरमेंट बचत से जुड़े कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। असाधारण संकट जैसे महामारी या राष्ट्रीय आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार को सीमित अवधि के लिए पीएफ योगदान घटाने अथवा स्थगित करने की शक्ति दी गई है। इसका सीधा असर कर्मचारी की मासिक टेक-होम सैलरी और पीएफ खाते में जमा होने वाली रकम पर पड़ सकता है।
सरकार के आदेश के बाद ही बदलेगी कटौती
नया प्रावधान अपने आप कर्मचारियों की पीएफ कटौती कम नहीं करता। सामान्य स्थिति में कर्मचारी के मूल वेतन के अनुसार लागू वैधानिक योगदान जारी रहेगा। सरकार जब किसी विशेष आपदा या महामारी के दौरान अधिसूचना जारी करेगी, तभी निर्धारित अवधि के लिए योगदान में बदलाव किया जा सकेगा।
यह राहत पूरे देश के लिए या किसी खास राज्य अथवा क्षेत्र के लिए अलग से लागू की जा सकती है। इसकी अधिकतम अवधि एक बार में तीन महीने तक हो सकती है।
समझें ₹6,000 वाले उदाहरण से
यदि किसी कर्मचारी के वेतन से सामान्य तौर पर हर महीने ₹6,000 पीएफ के रूप में कटते हैं और आपातकाल में यह राशि घटकर ₹5,000 हो जाती है, तो उसकी टेक-होम सैलरी ₹1,000 बढ़ जाएगी।
स्थिति सामान्य आपातकालीन उदाहरण असर
कर्मचारी का मासिक PF योगदान ₹6,000 ₹5,000 ₹1,000 कम कटौती
हाथ में आने वाली सैलरी सामान्य ₹1,000 अधिक तत्काल नकदी राहत
3 महीने का PF जमा ₹18,000 ₹15,000 ₹3,000 कम जमा
रिटायरमेंट फंड सामान्य योगदान कम योगदान भविष्य की बचत पर असर
फायदा अभी, असर भविष्य में
पीएफ कटौती कम होने से संकट के समय कर्मचारी को तत्काल अतिरिक्त नकदी मिल सकती है। लेकिन दूसरी ओर, पीएफ खाते में कम राशि जमा होने के कारण उस अवधि के योगदान पर भविष्य में मिलने वाला ब्याज भी कम होगा। इसलिए टेक-होम सैलरी में बढ़ोतरी का लाभ तत्काल है, जबकि रिटायरमेंट कॉर्पस पर प्रभाव लंबी अवधि में दिखाई दे सकता है।
कर्मचारी खुद नहीं घटा सकते PF
कर्मचारी अपनी इच्छा से वैधानिक पीएफ योगदान को कम नहीं कर सकता। नियोक्ता भी अपनी तरफ से निर्धारित योगदान दर में बदलाव नहीं कर सकता। किसी आपातकालीन छूट का लाभ तभी मिलेगा, जब सरकार इसके लिए औपचारिक आदेश जारी करेगी।
घटाना और स्थगित करना अलग-अलग
पीएफ योगदान घटाने का अर्थ है कि तय अवधि के लिए योगदान की दर कम कर दी जाए। वहीं स्थगन का मतलब है कि भुगतान को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए और लागू नियमों के अनुसार बाद में उसकी भरपाई की जा सके।
VPF वालों के लिए क्या बदलेगा
जो कर्मचारी अनिवार्य पीएफ से अतिरिक्त रकम अपनी इच्छा से जमा करते हैं, वे VPF का इस्तेमाल करते हैं। आपातकालीन प्रावधान मुख्य रूप से वैधानिक EPF योगदान से जुड़ा है। VPF में अतिरिक्त योगदान को लेकर स्थिति सरकार के आदेश और संबंधित नियमों पर निर्भर करेगी।
EPF और VPF में आसान अंतर
EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि नौकरीपेशा लोगों के लिए निर्धारित वैधानिक बचत व्यवस्था है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों इसमें नियमों के अनुसार योगदान करते हैं।
VPF यानी स्वैच्छिक भविष्य निधि कर्मचारी की अतिरिक्त रिटायरमेंट बचत है। कर्मचारी अपनी इच्छा से अनिवार्य योगदान से अधिक रकम इसमें जमा कर सकता है। इस अतिरिक्त राशि पर नियोक्ता की ओर से समान योगदान करना अनिवार्य नहीं होता।
suntimes 