गर्भवती महिलाओं को मिलेगा ज्यादा आरामदायक माहौल, नॉर्मल डिलीवरी पर WHO का फोकस

जिला अस्पताल के MCH यूनिट का निरीक्षण; बर्थ कम्पेनियन, म्यूजिक और बर्थिंग बॉल के इस्तेमाल का सुझाव, लेबर रूम में प्राइवेसी बढ़ाने पर भी जोर

गर्भवती महिलाओं को मिलेगा ज्यादा आरामदायक माहौल, नॉर्मल डिलीवरी पर WHO का फोकस

दुर्ग-भिलाई। जिला अस्पताल दुर्ग में गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव प्रक्रिया को अधिक सहज और सुरक्षित बनाने की दिशा में नई व्यवस्थाओं पर काम शुरू करने की तैयारी है। सोमवार को WHO से जुड़ी दो सदस्यीय स्वास्थ्य टीम ने अस्पताल की मदर एंड चाइल्ड केयर (MCH) यूनिट और एसएनसीयू का निरीक्षण किया। टीम ने नॉर्मल डिलीवरी को प्रोत्साहित करने, अनावश्यक सिजेरियन से बचने और लेबर रूम में महिलाओं को बेहतर मानसिक एवं शारीरिक आराम देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

दोपहर करीब 12 बजे जिला अस्पताल पहुंची टीम ने सबसे पहले सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज के साथ बैठक की। करीब एक घंटे चली चर्चा में मरीजों की सुरक्षा, प्रसव सेवाओं और लेबर रूम की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। इसके बाद टीम ने MCH यूनिट का निरीक्षण कर गायनेकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से प्रसव प्रक्रिया को लेकर चर्चा की।

नॉर्मल डिलीवरी बढ़ाने के लिए लेबर रूम में बदलाव

यूनिट की प्रभारी डॉ. विनीता धुर्वे ने बताया कि वर्तमान में सिजेरियन डिलीवरी का अनुपात बढ़ रहा है, जबकि सामान्य प्रसव की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसे देखते हुए WHO की टीम ने लेबर रूम के मौजूदा सेटअप और कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव करने के सुझाव दिए। टीम ने प्रसव के दौरान महिला को तनावमुक्त और सहज रखने को सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

पसंद के व्यक्ति को बनाया जा सकेगा बर्थ कम्पेनियन

टीम ने प्रसव के दौरान गर्भवती महिला के साथ उसकी पसंद के किसी व्यक्ति को बर्थ कम्पेनियन के रूप में रखने का सुझाव दिया। इससे महिला को भावनात्मक सहारा मिलने के साथ प्रसव के दौरान उसका आत्मविश्वास और सहजता बढ़ सकती है। अस्पताल में ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई।

मां खुद सुन सकेगी बच्चे की धड़कन

WHO टीम ने डॉप्लर की सुविधा शुरू करने का सुझाव दिया। इसके माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन सुनी और उसकी गति की निगरानी की जा सकती है। टीम ने स्वास्थ्यकर्मियों को यह प्रक्रिया महिला को समझाने और उसे भी बच्चे की धड़कन सुनाने पर जोर दिया, ताकि गर्भवती महिला जांच प्रक्रिया में अधिक सक्रिय रूप से जुड़ सके।

तय पोजीशन के बजाय महिला की सुविधा को प्राथमिकता

प्रसव के दौरान महिला को एक ही निर्धारित स्थिति में रखने के बजाय उसकी सुविधा के अनुसार पोजीशन देने की सलाह दी गई। टीम ने टेबल की जगह बेड पर महिला को आरामदायक स्थिति में प्रसव कराने की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान महिला को अधिक सहज बनाना है।

पर्दों की जगह पार्टिशन, हर महिला के लिए अलग स्पेस

लेबर वार्ड में महिलाओं की निजता को लेकर भी टीम ने बदलाव सुझाए। वर्तमान में पर्दों के माध्यम से प्राइवेसी उपलब्ध कराई जाती है। इसके स्थान पर पार्टिशन लगाने की सलाह दी गई, ताकि प्रत्येक महिला के लिए अपेक्षाकृत अलग और निजी स्थान उपलब्ध कराया जा सके।

बर्थिंग बॉल और म्यूजिक से तनाव कम करने का सुझाव

टीम ने प्रसव के दौरान अनावश्यक इंडक्शन से बचने की सलाह दी। साथ ही लेबर रूम में बर्थिंग बॉल उपलब्ध कराने का सुझाव दिया गया, जिससे गर्भवती महिला अपनी सुविधा के अनुसार हल्की गतिविधि और एक्सरसाइज कर सके। प्रसव के दौरान माहौल को शांत और तनावमुक्त रखने के लिए हल्का म्यूजिक चलाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया।

प्रसव के बाद ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल पर चर्चा

बैठक में प्रसव के बाद ऑक्सीटोसिन के उपयोग को लेकर भी स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी दी गई। टीम ने प्लेसेंटा निकलने के बाद ऑक्सीटोसिन देने के संबंध में आवश्यक प्रक्रिया का पालन करने का सुझाव दिया। इसके साथ ही प्रसव के दौरान महिला को लगातार मानसिक सहयोग और आराम देने को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

WHO टीम के निरीक्षण और बैठक का मुख्य उद्देश्य जिला अस्पताल में प्रसव सेवाओं को अधिक महिला-केंद्रित बनाना, सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देना और जहां चिकित्सकीय आवश्यकता न हो वहां अनावश्यक सिजेरियन डिलीवरी को कम करने की दिशा में व्यवस्थाओं को बेहतर करना रहा।