पंडवानी गायन की पहचान तीजन बाई ने दुनिया को कहा अलविदा
महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली से विश्व मंच तक पहुंचाने वाली पद्म विभूषण सम्मानित कलाकार ने 70 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। अपनी दमदार आवाज और अद्भुत मंच प्रस्तुति से करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाने वाली तीजन बाई ने शनिवार देर रात रायपुर एम्स में अंतिम सांस ली। उनके निधन से कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर है।
दुर्ग। भारतीय लोक कला की एक युगप्रवर्तक हस्ती और पंडवानी गायन की पहचान बन चुकीं डॉ. तीजन बाई का निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। शनिवार रात लगभग 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली।
तीजन बाई ने अपनी प्रभावशाली आवाज, अभिनय कौशल और विशिष्ट प्रस्तुति शैली से पंडवानी को देश की सीमाओं से बाहर वैश्विक मंच तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को जिस जीवंत और भावपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया, उसने लोक कला को एक नई दिशा और पहचान दी।
उनकी कला यात्रा केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने भारतीय लोक संस्कृति को दुनिया के सामने गर्व के साथ प्रस्तुत किया। भारतीय कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उनके निधन से भारतीय लोक कला जगत ने एक अमूल्य धरोहर खो दी है।
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