त्वचा कैंसर की दवा को सीधे प्रभावित हिस्से तक पहुंचाएगा हाइड्रोजेल, लैब टेस्ट में दिखा बेहतर असर
रूंगटा यूनिवर्सिटी के शोध में चिटोसान से तैयार हुआ जेल; 5-फ्लुओरोयूरेसिल के साथ कैंसर कोशिकाओं पर किया परीक्षण, अब पशुओं पर जांच की तैयारी
भिलाई। त्वचा कैंसर के इलाज को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाने की दिशा में रूंगटा यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। स्कूल ऑफ फार्मेसी की डायरेक्टर डॉ. मधुलिका प्रधान और डॉ. कृष्णा यादव ने चिटोसान से एक हाइड्रोजेल तैयार किया है, जिसमें त्वचा कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवा 5-फ्लुओरोयूरेसिल (5-FU) को शामिल किया गया है। प्रयोगशाला में त्वचा कैंसर की कोशिकाओं पर किए गए परीक्षण में इस संयोजन ने सामान्य 5-FU घोल की तुलना में बेहतर कैंसररोधी प्रभाव दिखाया। शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल केमिस्ट्री सिलेक्ट में प्रकाशित किया गया है।
चिटोसान से तैयार किया गया हाइड्रोजेल
शोध के लिए चिटोसान नामक प्राकृतिक पदार्थ को रासायनिक प्रक्रिया से संशोधित कर डायल्डिहाइड चिटोसान (DCH) तैयार किया गया। इसके बाद DCH को चिटोसान के साथ मिलाकर ऐसा हाइड्रोजेल विकसित किया गया, जिसमें 5-FU दवा को समाहित किया गया।
चिटोसान जैव-अनुकूल और शरीर में आसानी से टूटने वाला पदार्थ माना जाता है। इसी वजह से इसे दवा को लक्षित स्थान तक पहुंचाने वाली प्रणाली के लिए उपयोगी माना जा रहा है। विकसित हाइड्रोजेल की खासियत यह है कि त्वचा पर लगाने के बाद दवा एक साथ बाहर निकलने के बजाय धीरे-धीरे रिलीज हो सकती है।
12 घंटे में करीब 98% तक दवा रिलीज
शोधकर्ताओं ने अलग-अलग पीएच स्तर पर हाइड्रोजेल से दवा के रिलीज होने का परीक्षण किया। 12 घंटे के अध्ययन में पीएच 7.4 पर 97.89 प्रतिशत, पीएच 5.5 पर 94.5 प्रतिशत और पीएच 5 पर 98.34 प्रतिशत तक दवा रिलीज हुई। अध्ययन में करीब 80 प्रतिशत दवा शुरुआती पांच घंटे में बाहर निकलने की बात सामने आई।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, नियंत्रित तरीके से दवा रिलीज होने की क्षमता त्वचा के प्रभावित हिस्से पर दवा की उपलब्धता बनाए रखने में उपयोगी हो सकती है।
त्वचा के अनुकूल पाया गया जेल
हाइड्रोजेल का पीएच करीब 5.5 पाया गया, जो सामान्य त्वचा के पीएच के आसपास है। परीक्षण में इसे फैलने योग्य और ट्यूब से आसानी से निकालकर लगाने योग्य पाया गया। इसकी सूक्ष्म संरचना की जांच में सतह पर छोटे-छोटे छिद्र और एकसमान बनावट दिखाई दी।
शोधकर्ताओं के अनुसार, ये विशेषताएं हाइड्रोजेल को त्वचा पर लगाने और दवा को प्रभावित हिस्से तक पहुंचाने के लिए उपयोगी बना सकती हैं।
कैंसर कोशिकाओं पर बढ़ती खुराक के साथ असर
हाइड्रोजेल का सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण B16F10 त्वचा कैंसर कोशिकाओं पर किया गया। अलग-अलग मात्रा में 5-FU युक्त हाइड्रोजेल को कैंसर कोशिकाओं पर आजमाया गया। परीक्षण में दवा की मात्रा बढ़ने के साथ कैंसर कोशिकाओं के जीवित रहने की क्षमता में कमी देखी गई।
शोधकर्ताओं के अनुसार, हाइड्रोजेल के माध्यम से दी गई 5-FU ने केवल 5-FU के घोल की तुलना में अधिक कैंसररोधी प्रभाव प्रदर्शित किया। अध्ययन में इस प्रभाव को खुराक बढ़ने के साथ बढ़ने वाला बताया गया है।
टाटा मेमोरियल सेंटर में हुआ कैंसररोधी परीक्षण
शोध के विभिन्न चरणों में कई संस्थानों की विशेषज्ञता और सुविधाओं का उपयोग किया गया। कैंसररोधी परीक्षण मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल सेंटर के ACTREC में किया गया। वहीं हाइड्रोजेल की सूक्ष्म संरचना समेत कुछ अन्य परीक्षणों के लिए रायपुर की कलिंगा यूनिवर्सिटी की सुविधाओं का उपयोग किया गया।
अभी प्रयोगशाला स्तर पर शोध, आगे होगा पशु परीक्षण
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन अभी प्रयोगशाला स्तर पर है। इसे मरीजों के उपचार में इस्तेमाल करने से पहले इसकी सुरक्षा, लंबे समय तक होने वाले प्रभाव और सामान्य गैर-कैंसर कोशिकाओं पर पड़ने वाले असर की विस्तृत जांच जरूरी होगी।
अगले चरण में हाइड्रोजेल का
पशुओं पर परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए देश-विदेश के चिकित्सा एवं शोध विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जा रहा है। यदि आगामी परीक्षणों में इसके परिणाम सुरक्षित और प्रभावी पाए जाते हैं, तो भविष्य में त्वचा कैंसर की दवा को प्रभावित हिस्से तक सीधे पहुंचाने वाली तकनीक के रूप में इसके आगे विकसित होने की संभावना बन सकती है।
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