महानदी पर सहमति की नई पहल, अमित शाह के साथ एक मंच पर बैठेंगे छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्यमंत्री
1 अक्टूबर को होगी उच्चस्तरीय बैठक, जल बंटवारे और प्रबंधन पर दोनों राज्यों के बीच निकलेगा समाधान का रास्ता तलाशने का प्रयास
रायपुर। महानदी जल विवाद को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच जारी बातचीत अब उच्चस्तरीय बैठक तक पहुंच गई है। 1 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक प्रस्तावित है। इसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखेंगे। दोनों राज्यों के वरिष्ठ प्रशासनिक और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में जल बंटवारे तथा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। वर्ष 2018 से ट्रिब्यूनल में लंबित इस मामले के समाधान के लिए बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महानदी के जल उपयोग और बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ तथा ओडिशा के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दोनों राज्यों के बीच आपसी सहमति बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहल पर 1 अक्टूबर को महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसमें दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
ओडिशा के महाधिवक्ता पितांबर आचार्य ने प्रस्तावित बैठक की जानकारी दी है। बैठक का मुख्य उद्देश्य महानदी के जल बंटवारे और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर दोनों राज्यों के बीच संवाद को आगे बढ़ाना है। इसके जरिए विवाद का आपसी समझ और सहमति से समाधान तलाशने की कोशिश की जाएगी।
ट्रिब्यूनल में लंबित मामले के बीच बढ़ी बातचीत
महानदी जल विवाद वर्ष 2018 से महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है। इस दौरान दोनों राज्यों के बीच कई स्तरों पर चर्चा हो चुकी है। केंद्रीय जल आयोग के सचिव ने पूर्व में हुई बैठकों की जानकारी ट्रिब्यूनल के सामने रखी है, जिसे रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
अब 1 अक्टूबर की बैठक में जल बंटवारे से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विचार होने की संभावना है। दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की भागीदारी से चर्चा को तथ्यात्मक आधार मिलने की उम्मीद है।
साय-माझी की मुलाकात के बाद अगला कदम
इससे पहले 20 सितंबर को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भुवनेश्वर में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच एक घंटे से अधिक समय तक विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। महानदी जल विवाद भी बातचीत का अहम हिस्सा रहा।
मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि दोनों राज्यों के बीच विवाद के समाधान के लिए बातचीत जारी है और जल्द ही रास्ता निकलने की उम्मीद है। इस मुलाकात के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक को समाधान की दिशा में अगली कड़ी माना जा रहा है।
केंद्र की पहल से सहमति बनाने की कोशिश
30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। उस बैठक में बातचीत, तकनीकी सहयोग और आपसी सहमति के माध्यम से विवाद सुलझाने पर जोर दिया गया था।
लगातार हो रही बैठकों से स्पष्ट है कि दोनों राज्यों के बीच जल विवाद के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाया जा रहा है। हालांकि, जल बंटवारे के अंतिम स्वरूप और सहमति पर अभी निर्णय होना बाकी है।
कृषि से लेकर उद्योग तक महानदी पर निर्भरता
महानदी का महत्व दोनों राज्यों के लिए केवल जल उपलब्धता तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ में कृषि, पेयजल और विकास गतिविधियों के लिए नदी महत्वपूर्ण है। वहीं ओडिशा में सिंचाई, बिजली उत्पादन और उद्योगों की जरूरतें भी इससे जुड़ी हैं। ऐसे में जल बंटवारे को लेकर होने वाला कोई भी निर्णय दोनों राज्यों के किसानों, उद्योगों और आम नागरिकों को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि इस विवाद का समाधान आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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