जिंदगी और 174 यात्रियों के बीच था एक फैसला, कैप्टन स्मित ने खोला कॉकपिट का दरवाजा

पीएम मोदी से बातचीत में सुनाया आपात स्थिति का अनुभव, बोले- विमान नीचे जा रहा था, लगा अब कुछ करना ही होगा

जिंदगी और 174 यात्रियों के बीच था एक फैसला, कैप्टन स्मित ने खोला कॉकपिट का दरवाजा

नई दिल्ली। विमान में अचानक पैदा हुई गंभीर आपात स्थिति के दौरान घायल होने के बावजूद कार्रवाई करने वाले कैप्टन स्मित मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में उस समय का अनुभव साझा किया। करीब 9 मिनट की वीडियो कॉल में उन्होंने बताया कि चोट लगने के बाद भी उन्हें महसूस हो रहा था कि विमान नीचे जा रहा है। उन्हें लगा कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया। उस दौरान वे हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों में हनुमान चालीसा का पाठ करने की आदत है और उस घटना के दौरान भी वे इसे पढ़ रहे थे।

प्रधानमंत्री ने कैप्टन स्मित से घटना के दौरान की स्थिति के बारे में जानकारी ली। स्मित ने बताया कि एक झटके के बाद वे नीचे गिर गए थे और उन्हें काफी चोट लगी थी। इसके बावजूद विमान के नीचे जाने का अहसास उन्हें लगातार हो रहा था। उन्होंने अपने लंबे उड़ान अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि वे विमान की स्थिति को समझ पा रहे थे।

प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान स्मित भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं था कि कभी प्रधानमंत्री से उनकी इस तरह बातचीत होगी। प्रधानमंत्री ने उन्हें ढांढस देते हुए उनके साहस की सराहना की और उनके माता-पिता को भी याद किया।

कैप्टन स्मित का अबू धाबी में उपचार चल रहा है। उन्हें सऊदी अरब से एयरलिफ्ट कर यूएई लाया गया था। भारतीय राजदूत दीपक मित्तल ने अस्पताल में उनसे मुलाकात के बाद बताया था कि उनकी हालत स्थिर है और उपचार का अच्छा असर हो रहा है। भारतीय दूतावास भी उनके परिवार के संपर्क में है।

कैप्टन स्मित का विमान उड़ाने का लंबा अनुभव है। वे स्पाइसजेट में 11 साल से अधिक समय तक सेवाएं दे चुके हैं। इसके बाद जून 2022 में फ्लाईदुबई से जुड़े। बोइंग 737 उड़ाने के साथ वे पायलटों के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से जुड़े कार्य भी करते रहे हैं।

घटना के बाद उनकी भूमिका की इजराइल और अमेरिका की ओर से भी सराहना की गई। इजराइल ने उन्हें सम्मानित करने की बात कही है, जबकि गुजरात सरकार ने ‘विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार’ देने की घोषणा की है।