होर्मुज में फिर निशाने पर आया तेल टैंकर, हमले के बीच सुरक्षित निकाले गए 5 भारतीय
फरवरी से अब तक 11 भारतीय नाविकों की मौत; 4500 से अधिक भारतीय खाड़ी क्षेत्र के व्यावसायिक जहाजों पर तैनात
खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच शुक्रवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर पर मिसाइल हमला हुआ। कुवैत के झंडे वाले इस जहाज पर पांच भारतीय नाविक भी मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने शनिवार को इसकी पुष्टि की। बीते आठ महीनों में क्षेत्र में हुए हमलों के कारण 11 भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और 100 से अधिक नाविक प्रभावित हुए हैं।
मस्कट (A)। होर्मुज जलडमरूमध्य में शुक्रवार को एक बार फिर व्यावसायिक जहाज को निशाना बनाया गया। कच्चे तेल से लदा कुवैत के झंडे वाला टैंकर एमटी काजिमाह III मिसाइल हमले की चपेट में आ गया। जहाज अफ्रीका की ओर जा रहा था। इस दौरान उसमें पांच भारतीय नाविक सवार थे। राहत की बात यह रही कि सभी को सुरक्षित बचा लिया गया। ओमान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को घटना की पुष्टि की। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि हमला किसने किया।
इस घटना ने होर्मुज क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। फरवरी से अब तक यहां हुए विभिन्न हमलों में 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। इनमें 11 की मौत हो चुकी है।
समुद्री मार्गों पर तैनात हैं हजारों भारतीय
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को जानकारी दी थी कि खाड़ी क्षेत्र में संचालित व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से अधिक भारतीय नाविक तैनात हैं। इनमें भारत के लिए माल लेकर चलने वाले जहाजों के नाविक भी शामिल हैं।
उन्होंने बताया था कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले छह व्यावसायिक जहाज हैं। वहीं, छह विदेशी झंडे वाले जहाज भी भारत के लिए सामान लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर लगभग 163 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
भारतीय शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर निगरानी रख रहा है। विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय एजेंसियों के संपर्क में हैं और नाविकों की सुरक्षा तथा उनके हालात की जानकारी ले रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है।
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में उठाई थी चिंता
समुद्री जहाजों पर हमलों का मुद्दा भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
उन्होंने कहा था कि समुद्र में पैदा हो रहे नए खतरे पहले से मौजूद जमीनी संकटों को और बढ़ा रहे हैं। इन घटनाओं में भारतीयों के अलावा अन्य देशों के नाविकों की भी जान गई है। उन्होंने इसे अस्वीकार्य बताते हुए खाड़ी क्षेत्र में तत्काल तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील की थी।
जयशंकर ने कहा था कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि जहाजों पर काम करने वाले चालक दल सुरक्षित रह सकें। इससे ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का निर्बाध संचालन भी बना रहेगा।
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