बस्तर की सिंचाई परियोजनाओं पर 1.90 करोड़ खर्च, किसानों की आय बढ़ाने की पहल

बस्तर की सिंचाई परियोजनाओं पर 1.90 करोड़ खर्च, किसानों की आय बढ़ाने की पहल

सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना समेत विभिन्न संरचनाओं के मरम्मत व अनुरक्षण के लिए 1 करोड़ 90 लाख रुपये का प्रावधान किया है।

बस्तर जिले में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जल संसाधन विभाग ने कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना सहित अन्य सिंचाई संरचनाओं के मरम्मत और अनुरक्षण के लिए कुल 1 करोड़ 90 लाख रुपए का प्रावधान किया है। यह राशि न केवल सिंचाई योजनाओं की मरम्मत पर खर्च की जाएगी, बल्कि इससे क्षेत्र के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराकर उनकी कृषि उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

किसानों की आय में वृद्धि

जनवरी 2026 तक कुल 1 करोड़ 90 लाख रुपए में से अब तक लगभग 1 करोड़ 9 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इन खर्चों का उपयोग एनीकट व नहरों की वार्षिक मरम्मत, लघु सिंचाई योजनाओं, स्टॉपडेम, तालाब और अन्य जलाशयों के रखरखाव कार्यों में किया जा रहा है। जल संसाधन विभाग की यह पहल बस्तर क्षेत्र में सिंचाई की समस्याओं को कम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए अहम मानी जा रही है।

बस्तर जिले में वर्तमान में कुल 39 एनीकट, 7 सिंचाई योजनाएं, 7 स्टॉपडेम और 32 तालाब संचालित हैं। ये संरचनाएं सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं और क्षेत्र के कृषि विकास को प्रोत्साहित करती हैं।

विकासखंडवार स्थिति देखें

विकासखंडवार स्थिति देखें तो बस्तर विकासखंड में सर्वाधिक 20 एनीकट, 3 सिंचाई योजनाएं, 1 स्टॉपडेम और 13 तालाब स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त, बकावंड में 8 एनीकट और 9 तालाब, जगदलपुर में 3 एनीकट, 3 सिंचाई योजनाएं और 3 तालाब, तोकापाल में 2 एनीकट, 1 सिंचाई योजना और 2 तालाब, लोहण्डीगुड़ा में 4 एनीकट, 1 स्टॉपडेम और 4 तालाब मौजूद हैं। दरभा में 1 तालाब और बास्तानार में 2 एनीकट स्थापित हैं।

रबी की फसल में मिलेगी सिंचाई सुविधा

सरकार ने इस योजना के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि सिंचाई संरचनाओं की मरम्मत समय पर हो और किसानों को बिना किसी रुकावट के रबी की फसल के दौरान सिंचाई सुविधा मिलती रहे। इससे क्षेत्र के कृषि उत्पादन में वृद्धि होने की उम्मीद है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस तरह बस्तर जिले में कोसारटेडा मध्यम सिंचाई परियोजना सहित अन्य सिंचाई संरचनाओं के विकास से किसानों की जीवन गुणवत्ता में सुधार और कृषि क्षेत्र में समृद्धि की नई उम्मीद जगी है।

सूखे के समय भी कृषि को संजीवनी

जल संसाधन विभाग की यह योजना क्षेत्र के किसानों को बेहतर सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ-साथ जल संरक्षण को भी प्रोत्साहित करती है। एनीकट, स्टॉपडेम और तालाब जल संचयन में सहायक होते हैं, जो सूखे के समय भी कृषि को संजीवनी देते हैं। इसी वजह से इन जल संरचनाओं की मरम्मत और सही रखरखाव क्षेत्र की कृषि वृद्धि के लिए आवश्यक है।

इस परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है, जिससे उनका रोजगार बढ़े और वे अपने क्षेत्र की जल व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक हों। इससे बस्तर के किसानों को सिंचाई में आने वाली बाधाओं को कम करने में मदद मिलेगी।