भिलाई में अंडर-20 राष्ट्रीय कुश्ती स्पर्धा का आगाज़, 28 राज्यों के 1100 पहलवानों ने दिखाई दमखम
डोम शेड में पहली बार राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता, खेल ढांचे को लेकर उठी नई मांगें
*दुर्ग जिले के भिलाई में अंडर-20 राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसमें देशभर के 28 राज्यों और सर्विसेस के 1100 से अधिक पहलवानों ने हिस्सा लिया। पोलो ग्राउंड में बनाए गए विशेष डोम शेड में आयोजित इस स्पर्धा ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय खेल मानचित्र पर नई पहचान दी है।*
भिलाई के पोलो ग्राउंड में शुक्रवार को खेल उत्साह और ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब अंडर-20 राष्ट्रीय कुश्ती स्पर्धा का भव्य उद्घाटन हुआ। विशालकाय डोम शेड में आयोजित इस प्रतियोगिता में देशभर के 28 राज्यों और सर्विसेस टीम के लगभग 1100 पहलवान, 198 कोच और मैनेजर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने पहुंचे हैं।
उद्घाटन समारोह में ओलंपिक संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय सिंह और दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल ने शिरकत कर खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। इस दौरान कुश्ती संघ के कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
हजारों दर्शकों की मौजूदगी में शुरू हुई इस प्रतियोगिता को लेकर सांसद विजय बघेल ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब छत्तीसगढ़ के भिलाई में राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित हो रही है। उन्होंने आयोजन के लिए बृजभूषण शरण सिंह का आभार जताते हुए कहा कि जिले में बड़े ऑडिटोरियम और इंडोर स्टेडियम के अभाव के बावजूद डोम शेड बनाकर बेहतर आयोजन की कोशिश की गई है। साथ ही उन्होंने भविष्य में आधुनिक इंडोर स्टेडियम और ऑडिटोरियम की मांग को लेकर खेल मंत्री से पहल करने की बात भी कही।
वहीं, बृजभूषण शरण सिंह ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि बिना स्थायी हॉल के इतने बड़े स्तर पर प्रतियोगिता आयोजित करना सराहनीय है। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताया और कहा कि इससे खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों को लाभ मिलेगा।
कुश्ती संघ से जुड़े पूर्व विवादों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि अब स्थिति सामान्य है और भविष्य में खेल को नई दिशा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
इस प्रतियोगिता से स्थानीय खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्राप्त होगा, जिससे उनके कौशल में निखार आएगा। भिलाई में इस आयोजन ने न केवल खेल प्रेमियों को रोमांचित किया है, बल्कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना की जरूरत को भी उजागर किया है।
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