‘मुसवा’ विवाद पर विधानसभा में जोरदार हंगामा, 30 विधायक निलंबित; अतिक्रमण मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट

धान खरीदी में 8500 करोड़ के नुकसान का विपक्ष का आरोप, सरकार ने बताया निराधार

‘मुसवा’ विवाद पर विधानसभा में जोरदार हंगामा, 30 विधायक निलंबित; अतिक्रमण मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट

*छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को धान खरीदी और भंडारण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। ‘मुसवा’ यानी चूहों द्वारा धान खाए जाने के आरोप को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ, जिसके चलते कांग्रेस के 30 विधायकों को निलंबित करना पड़ा। हालांकि बाद में यह निलंबन वापस ले लिया गया।*

रायपुर। विधानसभा में धान खरीदी से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि खरीफ विपणन सीजन 2024-25 में किसानों से खरीदे गए धान के बड़े हिस्से का समुचित भंडारण नहीं हो सका। विपक्ष का दावा था कि बड़ी मात्रा में धान या तो चूहों द्वारा नष्ट कर दिया गया, या फिर भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से बेच दिया गया अथवा खराब रखरखाव के कारण खराब हो गया।

कांग्रेस ने इस पूरे मामले में राज्य को करीब 8500 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया। इस मुद्दे को लेकर सदन में तीखी बहस हुई और स्थिति हंगामे में बदल गई। शोर-शराबे के बीच कांग्रेस के 30 विधायकों को सदन से निलंबित कर दिया गया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

शून्यकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के सुरक्षित भंडारण की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि 2024-25 के खरीफ विपणन सीजन में 149.25 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जिसमें से 22.71 लाख क्विंटल धान का अब तक निपटान नहीं हो पाया है।

महंत ने आरोप लगाया कि मार्कफेड के भंडारण केंद्रों से 16.03 लाख क्विंटल और खरीदी केंद्रों से 6.67 लाख क्विंटल धान गायब बताया जा रहा है। उनका कहना था कि यह धान अब फेयर एवरेज क्वालिटी का भी नहीं रहा है।

इन आरोपों पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने स्पष्ट किया कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी प्रकार का कुप्रबंधन या बड़े पैमाने पर नुकसान होने का दावा सही नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य में 25.49 लाख किसानों से 149.25 लाख टन धान की खरीदी की गई है और किसानों को एमएसपी के रूप में 34,349 करोड़ रुपए तथा कृषक उन्नति योजना के तहत 11,928 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।

मंत्री ने कहा कि बोनस सहित प्रति क्विंटल 3100 रुपए की दर से धान खरीदने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है। उन्होंने बताया कि खरीदे गए धान के निपटान की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तय की गई है और प्रक्रिया जारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि 18.36 लाख टन अतिरिक्त धान का ऑनलाइन नीलामी के माध्यम से निपटान किया जा चुका है, जबकि करीब 1.60 लाख टन धान भंडारण केंद्रों और 67 हजार टन धान खरीदी केंद्रों में मौजूद है, जो कुल खरीदी का तीन प्रतिशत से भी कम है।

मंत्री बघेल ने इस आरोप को भी खारिज किया कि चूहों ने धान खा लिया या अधिकारियों ने उसे बेच दिया। उन्होंने बताया कि धान की सुरक्षा के लिए कवर और कीट नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सदन में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस पर मंत्री केदार कश्यप ने जवाब दिया, लेकिन विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुआ और कांग्रेस विधायकों ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।