म्यूल खातों के जरिए साइबर ठगी का जाल उजागर, चार अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार
जामुल थाना क्षेत्र में कार्रवाई; 13 पासबुक, 18 एटीएम कार्ड, 12 सिम और मोबाइल जब्त, न्यायिक रिमांड पर भेजे गए आरोपी
दुर्ग जिले में साइबर अपराध के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जामुल थाना पुलिस ने म्यूल खातों के माध्यम से अवैध लेनदेन करने वाले चार अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार कर बड़ी मात्रा में बैंकिंग दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। प्रारंभिक जांच में कई राज्यों से जुड़े साइबर धोखाधड़ी के मामलों की कड़ियां सामने आई हैं।
दुर्ग-भिलाई। जामुल थाना क्षेत्र में साइबर ठगी से जुड़े गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को धर दबोचा है। यह कार्रवाई सीसीएम मेडिकल कॉलेज रोड, कुरूद स्थित गुप्ता पीजी मकान के पास की गई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ युवक अन्य लोगों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर संदिग्ध लेनदेन कर रहे हैं।
सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी कर संदिग्धों को पकड़ा। तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से 13 बैंक पासबुक, 7 चेकबुक, 18 एटीएम कार्ड, 4 मोबाइल फोन, 12 सिम कार्ड और 5,700 रुपये नकद बरामद किए गए। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह साइबर ठगों को कमीशन के एवज में बैंक खाते उपलब्ध कराता था।
कई राज्यों से जुड़े तार
जब्त खातों का सत्यापन समन्वय पोर्टल पर किया गया। जांच में सामने आया कि दो पासबुक और एक चेकबुक से संबंधित खातों में केरल, कर्नाटक, बिहार और गुजरात में साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हैं। इससे यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय था और विभिन्न राज्यों में फैले साइबर अपराधियों से संपर्क में था।
पुलिस ने मोहम्मद अब्दुला राईन उर्फ अमन (24) निवासी अहमद नगर कैंप-02 छावनी, हिमांशु पटेल (31) निवासी सेक्टर-01 भिलाई भट्टी, पुट्टा राकेश बाबू (27) निवासी भीमावरम (आंध्र प्रदेश) और शुभम स्वाई (20) निवासी सुंदरगढ़ को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
कैसे काम करता है ‘म्यूल अकाउंट’ नेटवर्क?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिन्हें लालच या कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को उपयोग के लिए सौंप दिया जाता है। ठगी से प्राप्त राशि पहले इन खातों में ट्रांसफर की जाती है और बाद में एटीएम या अन्य माध्यम से निकालकर आगे भेज दी जाती है। इस प्रक्रिया में असली अपराधी पर्दे के पीछे रहते हैं, जबकि खातेधारक कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ जाते हैं।
पुलिस की अपील
दुर्ग पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। मामूली लालच या कमीशन के बदले दिया गया खाता बड़े साइबर अपराध का हिस्सा बन सकता है। संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन को दें।
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