कांग्रेस को बड़ा झटका, गोबरा-नवापारा की नेता प्रतिपक्ष ने दिया इस्तीफा, यह रिकॉर्ड किया था अपने नाम
गोबरा-नवापारा नगरपालिका की नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता संध्या राव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका देते हुए गोबरा-नवापारा नगरपालिका की नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता संध्या राव ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और क्षेत्र की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है।
तीन बार पार्षद चुनाव जीता
जानकारी के अनुसार संध्या राव गोबरा-नवापारा नगर पालिका की एक सक्रिय और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान रखती हैं। उन्होंने लगातार तीन बार पार्षद चुनाव जीतकर अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ का परिचय दिया है। इतना ही नहीं, वे क्षेत्र में सर्वाधिक मतों से जीत दर्ज करने वाली पार्षदों में भी शामिल रही हैं। उनके राजनीतिक सफर और जनाधार को देखते हुए उनका इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। संध्या राव ने अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उनके इस फैसले के पीछे कोई राजनीतिक कारण भी है या नहीं। साथ ही उन्होंने अपने भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी कोई खुलासा नहीं किया है।
लंबे समय से कांग्रेस से जुडी
संध्या राव लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़ी रही हैं और पार्टी के विभिन्न आंदोलनों, चुनावी अभियानों तथा संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। स्थानीय स्तर पर उनकी पहचान एक जुझारू और जनता के बीच रहने वाली नेता के रूप में रही है। यही वजह है कि उनके इस्तीफे को केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन के लिए एक राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पार्टी के नेताओं ने नहीं की कोई टिप्पणी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभनपुर विधानसभा क्षेत्र और गोबरा-नवापारा नगर पालिका क्षेत्र में संध्या राव का अच्छा जनाधार है। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। यदि वे भविष्य में किसी अन्य राजनीतिक दल से जुड़ती हैं, तो इसका असर आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल कांग्रेस संगठन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी के स्थानीय नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर टिप्पणी करने से परहेज किया है।
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