मैदान पर जोड़ी थी धाक, अब जिंदगी की जंग लड़ रहे कांबली, मेमोरी लॉस और ब्रेन क्लॉट से जूझ रहे सचिन के यार
विनोद कांबली की हेल्थ को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। ब्रेन क्लॉट और मेमोरी लॉस के बीच स्ट्रोक का खतरा कितना गंभीर है, जानिए पूरी जानकारी।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर Vinod Kambli की हेल्थ को लेकर हाल ही में आई खबरों ने एक बार फिर लोगों का ध्यान दिमाग से जुड़ी गंभीर बीमारियों की तरफ खींचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन पूरी तरह से खतरे से बाहर नहीं मानी जा रही।
दिमाग में ब्लड क्लॉट बना बड़ी परेशानी
डॉक्टरों के अनुसार, कंबली के दिमाग में ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) बना हुआ है। यह क्लॉट समय पर इलाज न मिलने की वजह से अब सर्जरी से हटाया नहीं जा सकता। यही वजह है कि उनके लिए Stroke का खतरा काफी बढ़ गया है। स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग तक खून की सप्लाई रुक जाती है या सही से नहीं पहुंचती।
याददाश्त पर पड़ा असर
सबसे ज्यादा चिंता की बात उनकी याददाश्त (memory) को लेकर है। बताया जा रहा है कि उन्हें कुछ बातें याद रहती हैं, लेकिन कई चीजें भूल जाती हैं। यानी उनकी मेमोरी पूरी तरह से काम नहीं कर रही। हालांकि राहत की बात ये है कि पिछले कुछ महीनों में उनकी हालत और खराब नहीं हुई है।
डॉक्टरों का मानना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि दिमाग के कुछ हिस्सों तक खून ठीक से नहीं पहुंच पा रहा। इसका असर सोचने-समझने और याद रखने की क्षमता पर पड़ता है। अच्छी बात ये है कि वे थोड़ी मदद से चल-फिर पा रहे हैं, लेकिन असली चिंता अभी भी दिमाग की सेहत को लेकर है।
स्ट्रोक का बना हुआ है खतरा
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सही देखभाल नहीं हुई तो ये स्थिति कभी भी स्ट्रोक में बदल सकती है। स्ट्रोक होने पर लकवा, बोलने में दिक्कत या फिर दिमागी कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लाइफस्टाइल भी बना रिस्क
रिपोर्ट्स के मुताबिक कंबली ने शराब पीना छोड़ दिया है, जो एक अच्छा कदम है। लेकिन स्मोकिंग (धूम्रपान) अभी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कई बार वे भूल जाते हैं कि उन्हें सिगरेट से दूर रहना है। डॉक्टर बताते हैं कि स्मोकिंग ब्लड वेसल्स (खून की नसों) को नुकसान पहुंचाती है और क्लॉट बनने का खतरा बढ़ाती है, जिससे स्ट्रोक का रिस्क और बढ़ जाता है।
ब्रेन क्लॉट क्या करता है?
दिमाग में बना क्लॉट खून के फ्लो को रोक देता है, जिससे दिमाग की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिलती। इससे मेमोरी, बोलने की क्षमता, बैलेंस और शरीर के मूवमेंट पर असर पड़ सकता है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
बार-बार चीजें भूलना या कन्फ्यूजन
चलने में लड़खड़ाहट
साफ बोलने में दिक्कत
शरीर के एक हिस्से में कमजोरी
तेज सिरदर्द
नजर कमजोर होना
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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