श्रमिक कल्याण में छत्तीसगढ़ ने रचा नया अध्याय, ढाई साल में लाखों परिवारों को मिला सुरक्षा और सम्मान का आधार

67 योजनाओं का विस्तार, डिजिटल सेवाओं से आसान हुई पहुंच; पंजीयन, आवास, मातृत्व सहायता और सामाजिक सुरक्षा में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

श्रमिक कल्याण में छत्तीसगढ़ ने रचा नया अध्याय, ढाई साल में लाखों परिवारों को मिला सुरक्षा और सम्मान का आधार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों के दौरान श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और त्वरित सेवा व्यवस्था पर विशेष जोर दिया है। श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों तक योजनाओं का लाभ सरल और तेज़ी से पहुंचाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं।

छगन लाल लोन्हारे, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

राज्य सरकार श्रमिकों और उनके परिवारों की बेहतरी के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिला है।

श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और सहायता वितरण की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए श्रम विभाग ने ‘श्रमेव जयते’ पोर्टल और मोबाइल एप विकसित किया है। इसके माध्यम से श्रमिक ऑनलाइन पंजीयन, आवेदन और विभिन्न योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर रहे हैं।

सभी 33 जिलों तक पहुंचा श्रम विभाग का नेटवर्क

प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पांच नए जिलों — मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती — में श्रम अधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। वर्तमान में 10 जिलों में सहायक श्रमायुक्त कार्यालय तथा 23 जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय संचालित हैं। इस प्रकार राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम विभाग की सेवाएं उपलब्ध हो गई हैं।

श्रम कानूनों में सुधार, रोजगार को मिली गति

उद्योगों और श्रमिकों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से श्रम कानूनों में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। दुकानों एवं स्थापना अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य की सुविधा तथा फैक्ट्री लाइसेंस की अवधि में वृद्धि जैसे निर्णयों ने रोजगार सृजन के साथ श्रमिक अधिकारों को भी मजबूत किया है।

12.65 लाख नए पंजीयन, 17.82 लाख श्रमिक लाभान्वित

1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया। इसी अवधि में 17.82 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया गया, जिन पर 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय हुई। निर्माण श्रमिकों को लगभग 780 करोड़ रुपये तथा असंगठित श्रमिकों को लगभग 187 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। लाभ वितरण को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली लागू की गई है।

24 घंटे संचालित हो रहे श्रमिक सहायता केंद्र

श्रमिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित किए जा रहे हैं। राज्यभर में लगाए गए मोबाइल शिविरों के माध्यम से लाखों श्रमिकों के पंजीयन, नवीनीकरण और आवेदन संबंधी समस्याओं का मौके पर समाधान किया गया है।

आवास, मातृत्व और शिक्षा सहायता को मिली मजबूती

सरकार ने मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना के तहत सहायता राशि बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दी है। इसके अलावा मृत्यु सहायता, दिव्यांग सहायता, छात्रवृत्ति और श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा सहायता जैसी योजनाओं के माध्यम से हजारों परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।

महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य और सम्मान को ध्यान में रखते हुए मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत निर्माण और असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता उपलब्ध कराई गई। वहीं शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

विकास की मुख्यधारा में श्रमिक कल्याण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में श्रमिक कल्याण को राज्य के विकास एजेंडे का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में श्रम विभाग ने तकनीकी नवाचार, पारदर्शी व्यवस्था और त्वरित सेवा के माध्यम से श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की है। पिछले ढाई वर्षों की यह उपलब्धि केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि की नई शुरुआत का प्रतीक बनकर उभरी है।