साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए खुशखबरी, नए पोर्टल से मिलेगा अटका हुआ पैसा, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने दी जानकारी

साइबर ठगी के पीड़ितों और निर्दोष खाताधारकों के लिए GRM और MRM पोर्टल शुरू किए गए हैं। रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि अब होल्ड की गई राशि वापस पाने की प्रक्रिया पहले से आसान होगी।

साइबर ठगी के पीड़ितों के लिए खुशखबरी, नए पोर्टल से मिलेगा अटका हुआ पैसा, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने दी जानकारी

साइबर ठगी का शिकार हुए पीड़ितों और अनजाने में ठगी की रकम खाते में आने से अकाउंट फ्रीज की समस्या झेल रहे निर्दोष लोगों को केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। गृह मंत्रालय, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की ओर से जीआरएम (ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म) और एमआरएम (मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल) पोर्टल की शुरुआत की गई है। पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के साप्ताहिक सोशल मीडिया लाइव कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) गौरव मंडल ने इन दोनों व्यवस्थाओं की विस्तृत कार्यप्रणाली साझा की।

खाता फ्रीज होने पर मददगार है जीआरएम पोर्टल

अक्सर देखा जाता है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के खाते ठगी की रकम ट्रांसफर हो जाती है, जिससे पुलिस उस खाते को होल्ड या फ्रीज कर देती है। पहले ऐसे खाताधारकों को कोर्ट और दूसरे राज्यों की पुलिस के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब वे जीआरएम पोर्टल का लाभ उठा सकते हैं।

यह है प्रक्रिया

खाताधारक या उसका अधिकृत प्रतिनिधि बैंक की किसी भी शाखा में जाकर दोबारा केवासी सत्यापित कराएगा। यदि खाताधारक वास्तविक पाया जाता है, तो बैंक उसकी शिकायत जीआरएम के माध्यम से सीधे संबंधित जांच अधिकारी को भेज देगा। यदि रायपुर के किसी व्यक्ति का खाता दिल्ली या अन्य राज्य की पुलिस ने होल्ड किया है, तो वहां जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन बयान दर्ज किए जा सकेंगे।

ठगी का पैसा वापस दिलाएगा एमआरएम पोर्टल

यह पोर्टल उन पीड़ितों के लिए है जिनकी डूबी हुई रकम बैंकिंग सिस्टम में कहीं होल्ड या सुरक्षित है। पीड़ित को एमआरएम पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत संख्या दर्ज करनी होगी। इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी के जरिए लॉगिन करके वे देख सकेंगे कि उनकी कितनी राशि होल्ड है और उसे वापस पाने के लिए ऑनलाइन दावा कर सकेंगे। यदि पीड़ित के पास कोर्ट का रिहाई आदेश है, तो उसे थाने ले जाने के बजाय सीधे एमआरएम पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है। जांच अधिकारी दस्तावेजों के सत्यापन के बाद बैंक को राशि जारी करने का निर्देश देगा।

साइबर एक्सपर्ट की महत्वपूर्ण सलाह

गोल्डन ऑवर ठगी होते ही शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या साइबरक्राइम पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि पैसा समय रहते ब्लॉक किया जा सके। यदि खाते में अचानक कोई अज्ञात राशि आ जाए, तो उसे खर्च या ट्रांसफर न करें। तत्काल बैंक को सूचित करें। साइबर ठग किराए के खातों (म्यूल अकाउंट) और फर्जी सिम का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसलिए अपना बैंक खाता, यूपीआई, सिम या ओटीपी कभी किसी से साझा न करें। कोई भी बैंक व्हाट्सएप पर फाइल या लिंक नहीं भेजता। संदिग्ध नंबरों की शिकायत भारत सरकार के 'संचार साथी' और 'चक्षु' पोर्टल पर जरूर करें।