एक गोली और 150 साल की जिंदगी! चीन की इस नई तकनीक से अब डेढ़ सौ साल तक रहेंगे जवान

एक गोली और 150 साल की जिंदगी! चीन की इस नई तकनीक से अब डेढ़ सौ साल तक रहेंगे जवान

 क्या इंसान 150 साल तक जी सकता है? नई रिसर्च में ऐसी एंटी-एजिंग गोली का दावा किया गया है जो शरीर के ‘जॉम्बी सेल’ हटाकर उम्र बढ़ाने में मदद कर सकती है।

लंबी उम्र जीने का सपना इंसान सदियों से देखता आया है। पहले के समय में औसत उम्र काफी कम होती थी, लेकिन आधुनिक चिकित्सा और बेहतर जीवनशैली की वजह से अब दुनिया भर में लोगों की औसत उम्र बढ़ी है। इसके बावजूद वैज्ञानिक लगातार ऐसे तरीकों की खोज में लगे हैं, जिनसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सके और बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों को रोका जा सके।

इसी बीच चीन की एक बायोटेक कंपनी ने ऐसा दावा किया है जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींच लिया है। चीन के शेनझेन शहर में स्थित एक स्टार्टअप कंपनी का कहना है कि वह ऐसी प्रयोगात्मक गोली पर काम कर रही है जो इंसान की उम्र को 150 साल तक बढ़ाने में मदद कर सकती है।

क्या है इस दवा का दावा

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह कंपनी ऐसी दवा तैयार कर रही है जो शरीर में मौजूद कुछ खास तरह की खराब कोशिकाओं को खत्म करने में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही कोशिकाएं उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करती हैं और कई बीमारियों की वजह बनती हैं। कंपनी के अनुसार इस दवा में अंगूर के बीज से निकाले गए कुछ खास तत्वों का इस्तेमाल किया गया है। ये तत्व शरीर में मौजूद हानिकारक कोशिकाओं को निशाना बनाकर उन्हें हटाने में मदद कर सकते हैं।

क्या होते हैं ‘जॉम्बी सेल’

वैज्ञानिक भाषा में इन्हें सेनेसेंट सेल कहा जाता है, लेकिन आम तौर पर इन्हें जॉम्बी सेल भी कहा जाता है। ये ऐसी कोशिकाएं होती हैं जो बूढ़ी या खराब हो चुकी होती हैं। ये कोशिकाएं शरीर में नई कोशिकाओं की तरह काम नहीं करतीं, लेकिन खत्म भी नहीं होतीं। इसके बजाय ये शरीर में रहकर सूजन पैदा करने वाले केमिकल छोड़ती रहती हैं।

समय के साथ इन कोशिकाओं की संख्या बढ़ने लगती है, जिससे शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यही कोशिकाएं हार्ट डिजीज, गठिया और दिमाग से जुड़ी बीमारियों जैसी कई उम्र से जुड़ी समस्याओं में भूमिका निभाती हैं।

कैसे काम कर सकती है यह गोली

कंपनी का दावा है कि यह नई दवा शरीर में मौजूद इन जॉम्बी सेल्स को खत्म करने में मदद कर सकती है। अगर इन कोशिकाओं को कम किया जा सके तो शरीर में सूजन कम हो सकती है और ऊतकों को होने वाला नुकसान भी घट सकता है। वैज्ञानिक इस तरह की दवाओं को सेनोलिटिक कहते हैं। इनका उद्देश्य शरीर से खराब और बूढ़ी कोशिकाओं को हटाना होता है। कुछ शुरुआती प्रयोगों में जानवरों पर इसके अच्छे नतीजे भी देखने को मिले हैं, जैसे शारीरिक क्षमता में सुधार और उम्र से जुड़ी गिरावट में कमी।

विशेषज्ञ क्यों बरतने को कह रहे हैं सावधानी

हालांकि इस तरह के दावों ने लोगों में उत्सुकता जरूर बढ़ाई है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी इन दवाओं को इंसानों के लिए सुरक्षित और प्रभावी साबित करने में काफी समय लग सकता है। किसी भी नई दवा को बाजार में आने से पहले कई चरणों के क्लीनिकल ट्रायल से गुजरना पड़ता है, जिसमें कई साल लग सकते हैं।