ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क का पर्दाफाश, ‘अन्ना रेड्डी’ ऐप से चल रहा था करोड़ों के लेन-देन का खेल

गरीबों के नाम पर खुलवाए बैंक खाते, तीन अंतरराज्यीय आरोपी गिरफ्तार; 81 एटीएम और डिजिटल उपकरण जब्त

दुर्ग पुलिस ने ऑनलाइन जुआ-सट्टा और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए तीन अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी कथित तौर पर ‘अन्ना रेड्डी’ नामक ऑनलाइन सट्टा ऐप के जरिए अवैध लेन-देन संचालित कर रहे थे और गरीब लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल कर रहे थे।

दुर्ग-भिलाई। ऑनलाइन जुआ-सट्टा और अवैध वित्तीय गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दुर्ग पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना खुर्सीपार क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टा ऐप के माध्यम से अवैध कारोबार चला रहे थे।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 81 एटीएम कार्ड, 62 बैंक पासबुक, पांच चेकबुक, 13 मोबाइल फोन, 11 सिम कार्ड, एक लैपटॉप और हार्ड डिस्क जब्त की है। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब ढाई लाख रुपए बताई गई है।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। बाद में उन खातों से जुड़े एटीएम कार्ड, सिम और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर उन्हें ऑनलाइन सट्टे के पैसों के लेन-देन के लिए इस्तेमाल करते थे। पुलिस को 21 जून को सूचना मिली थी कि आईटीआई खेल मैदान के समीप कुछ युवक मोबाइल और लैपटॉप के जरिए संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हैं। सूचना के आधार पर खुर्सीपार पुलिस और एंटी क्राइम एवं साइबर यूनिट की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की।

भागने की कोशिश में पकड़े गए आरोपी

एएसपी ग्रामीण मणिशंकर चंद्रा के अनुसार पुलिस को देखते ही तीनों युवक मौके से भागने लगे, लेकिन टीम ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके पास बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद हुए।

पूछताछ में आरोपियों ने ऑनलाइन सट्टा संचालन में शामिल होने की बात स्वीकार की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी “अन्ना रेड्डी” नामक ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए नेटवर्क संचालित कर रहे थे। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि आईपीएल सीजन के दौरान इस नेटवर्क का संचालन झारखंड के रांची से किया जा रहा था।

म्यूल अकाउंट के जरिए छिपाते थे लेन-देन

पुलिस के मुताबिक आरोपी “म्यूल अकाउंट” तकनीक का इस्तेमाल करते थे। इसके तहत ऐसे लोगों के नाम पर बैंक खाते खोले जाते थे जिनका अवैध लेन-देन से सीधा संबंध नहीं होता। इन खातों का उपयोग पैसों को अलग-अलग खातों में भेजने और असली नेटवर्क को छिपाने के लिए किया जाता था। फिलहाल पुलिस जब्त मोबाइल, बैंक खातों और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच कर रही है। साथ ही नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।