नेपाल की तबाही में 2,500 लापता, 320 भारतीय भी शामिल; दो झीलों से नई बाढ़ का खतरा
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भूस्खलन से बनी झीलों पर नजर, एक से पानी रिसने लगा; तिब्बत में 400 भारतीय फंसे
काठमांडू। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन की तबाही के बाद अब राहत एजेंसियों के सामने लापता लोगों की तलाश और नए खतरे से निपटने की चुनौती है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के कारण बनी दो झीलों में से एक से पानी का रिसाव जारी है, जबकि दूसरी झील का दायरा बढ़ रहा है। इससे निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है।
बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में भारी तबाही मचाई। पहाड़ी क्षेत्रों से आए पानी के तेज बहाव ने रास्ते में आने वाली मिट्टी, रेत, बजरी और विशाल चट्टानों को भी बहा दिया। रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्लांट और त्रिशूली नदी के आसपास का क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
आपदा के बाद नेपाल और तिब्बत में मौतों का आंकड़ा 633 तक पहुंच गया है। करीब 2,500 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक बताए गए हैं। वहीं, लगभग 400 भारतीय नागरिकों के तिब्बत में फंसे होने की जानकारी सामने आई है।
तबाही की तस्वीरें सैटेलाइट से सामने आईं
बाढ़ से पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में प्रभावित क्षेत्रों में हुए बड़े बदलाव स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। तिमुरे में कई इमारतें और सड़कें मलबे की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
भारत के सहयोग पर नेपाल ने जताया धन्यवाद
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने एक्स पर पोस्ट कर भारत के सहयोग और समर्थन के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार जताया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में भारत सरकार की चिंता और सहयोग के लिए नेपाल सरकार एवं जनता आभारी है।
हजारों परिवारों को भोजन-पानी की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल में बाढ़ के बाद मानवीय स्थिति को गंभीर बताया है। यूएन के अनुसार हजारों प्रभावित परिवारों को भोजन और स्वच्छ पेयजल की तत्काल आवश्यकता है। राहत अभियान में कई देश और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री और आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
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