पारंपरिक वेशभूषा और हथियारों के साथ निकली आदिवासी समाज की रैली, जंगल बचाने का दिया संदेश

विश्व आदिवासी दिवस पर भिलाई में दिखी जनजातीय संस्कृति की झलक, सेक्टर-1 से रिसाली तक गूंजे संरक्षण के स्वर

भिलाई। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। इस्पात नगरी भिलाई में भी आदिवासी समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक आयोजन किया। पारंपरिक वेशभूषा धारण कर और हाथों में पारंपरिक हथियार लेकर समाज के लोग नृत्य करते हुए सेक्टर-1 मुर्गा चौक से रिसाली स्थित आदिवासी भवन तक रैली के रूप में पहुंचे।

विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर भिलाई में आदिवासी समाज की ओर से भव्य रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में समाज के महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों और पारंपरिक हथियारों के साथ समाज के लोगों ने आदिवासी संस्कृति और विरासत की जीवंत झलक प्रस्तुत की। रैली के दौरान पारंपरिक नृत्य और गीतों ने माहौल को उत्साह और उमंग से भर दिया।

सेक्टर-1 मुर्गा चौक से शुरू हुई रैली विभिन्न मार्गों से होते हुए रिसाली स्थित आदिवासी भवन पहुंची। इस दौरान आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण एवं जंगलों को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समाज के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समाज का जंगल और प्रकृति से सदियों पुराना रिश्ता रहा है। जंगल ही उनकी संस्कृति, जीवनशैली और आजीविका का आधार रहे हैं। लगातार हो रही जंगलों की कटाई से आदिवासी समाज चिंतित और दुखी है। उन्होंने कहा कि जंगलों को उजाड़ने की प्रवृत्ति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जंगल केवल आदिवासी समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति के साथ-साथ पशु-पक्षियों और तमाम जीव-जंतुओं के अस्तित्व के लिए जरूरी हैं। यदि जंगल समाप्त होंगे तो इसका असर पूरे पर्यावरण और मानव जीवन पर पड़ेगा। इसलिए जंगलों को बचाने की जिम्मेदारी केवल किसी एक समाज की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर समाज के प्रतिनिधियों ने सभी वर्गों से पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट होने और जंगलों की कटाई रोकने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया। रैली के माध्यम से आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति के सम्मान के साथ प्रकृति और जंगलों के संरक्षण का मजबूत संदेश दिया।