रायपुर में सफाई मित्रों का वेतन संकट: रामकी कंपनी पर अनुबंध उल्लंघन और मानवाधिकार हनन के आरोप

मानवाधिकार आयोग ने नगर निगम से की कार्रवाई की मांग, कहा— करोड़ों की टिपिंग फीस लेने के बावजूद कर्मचारियों को समय पर नहीं मिल रहा वेतन

रायपुर में सफाई मित्रों का वेतन संकट: रामकी कंपनी पर अनुबंध उल्लंघन और मानवाधिकार हनन के आरोप

रायपुर शहर को स्वच्छ रखने वाले सफाई मित्र आज खुद आर्थिक तंगी और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने कचरा प्रबंधन कंपनी मेसर्स दिल्ली एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशंस लिमिटेड (रामकी) पर कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लगातार देरी करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। आयोग ने नगर निगम प्रशासन से कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों का बकाया भुगतान तत्काल सुनिश्चित करने की मांग की है।

रायपुर। राजधानी रायपुर में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था संचालित करने वाली कंपनी मेसर्स दिल्ली एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशंस लिमिटेड (रामकी) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग के छत्तीसगढ़ प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने रायपुर नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर कंपनी पर अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और सफाई मित्रों के मानवाधिकारों के हनन का गंभीर आरोप लगाया है।

आयोग का कहना है कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था संभालने वाले सैकड़ों सफाई मित्रों को हर महीने समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। जबकि नगर निगम से कंपनी को नियमित रूप से करोड़ों रुपए की टिपिंग फीस जारी की जा रही है। इसके बावजूद कर्मचारी अपने मेहनताना के लिए परेशान हैं और कई बार त्योहारों के दौरान भी उन्हें वेतन के लिए संघर्ष करना पड़ा।

प्रदुमन शर्मा ने कहा कि अनुबंध की धारा 5.1 (k) और 5.2 के तहत कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 7 तारीख तक वेतन भुगतान अनिवार्य है, लेकिन कंपनी लगातार इसमें लापरवाही बरत रही है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रायपुर शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग और गोल्ड मेडल का सपना देख रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि शहर को स्वच्छ रखने वाले ‘स्वच्छता दूत’ ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों में बढ़ता असंतोष आने वाले समय में शहर की सफाई व्यवस्था और प्रशासनिक छवि दोनों पर असर डाल सकता है।

आयोग ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि अनुबंध की धारा 32.1 के तहत इस मामले को ‘इवेंट ऑफ डिफॉल्ट’ मानते हुए कंपनी के आगामी भुगतान पर रोक लगाई जाए। साथ ही धारा 17.2 के तहत कंपनी के बिलों से 50 प्रतिशत राशि काटकर सीधे कर्मचारियों के खातों में जमा कराई जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

इसके अलावा आयोग ने कंपनी के प्रदर्शन मानकों की समीक्षा करते हुए आर्थिक दंड लगाने की भी मांग की है। प्रदुमन शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने सफाई मित्रों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो आयोग कर्मचारियों के संवैधानिक और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेगा।