सहकारी समिति हड़ताल तेज: भूपेश बघेल भी उतरे मैदान में, कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
14 दिनों से चार सूत्री मांगों पर डटे कर्मचारी; कांग्रेस का समर्थन, सरकार ने शुरू की सख्ती—कई प्रतिनिधि बर्खास्त
छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के कर्मचारी और अधिकारियों की 14 दिनों से जारी हड़ताल रविवार को और उग्र हो गई। चार सूत्री मांगों को लेकर आंदोलनरत कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। प्रदर्शनस्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायकों ने पहुंचकर आंदोलनकारियों का समर्थन किया और सरकार पर कर्मचारी हितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
भिलाई। छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल लगातार 14वें दिन भी जारी रही और सोमवार को आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया। अपनी चार सूत्री मांगों के समर्थन में दुर्ग संभाग सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे तकरीबन 1500 कर्मचारियों और अधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा देकर विरोध को और धारदार बना दिया।
इस दौरान प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कर्मचारियों की मांगों को ‘पूरी तरह न्यायसंगत’ बताते हुए कहा कि राज्य सरकार को तत्काल उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सहकारिता तंत्र को कमजोर करने वाले फैसलों से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
कंप्यूटर ऑपरेटरों के मुद्दे पर बघेल ने वर्तमान भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ऑपरेटरों की सेवा अवधि 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने इसे घटाकर 6 महीने कर दिया है। उन्होंने इसे ‘तुगलकी निर्णय’ बताते हुए कहा कि इससे समितियों में कामकाज बाधित होगा और किसान भी प्रभावित होंगे।
बघेल ने कहा, “किसानों की फसल तैयार है और वे धान बेचने समितियों में पहुंच रहे हैं, वहीं एग्रो स्टेट पंजीयन अनिवार्यता के कारण हजारों किसान प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं। लाखों हेक्टेयर धान बिकने से छूट जाएगा। ऐसे समय में सहकारी समितियों को कमजोर करना प्रशासनिक अव्यवस्था को और बढ़ाएगा।”
उधर, दूसरी ओर सरकार भी कड़े रुख में दिखाई दे रही है। जानकारी के मुताबिक हड़ताल का नेतृत्व कर रहे कई प्रतिनिधियों को बर्खास्त कर दिया गया है। बावजूद इसके, कर्मचारियों का कहना है कि जब तक चार सूत्री मांगें पूर्ण नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।
इस बीच, प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हड़ताल के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित न हों, इसके लिए प्रशासन ने कृषि, खाद्य तथा अन्य विभागों के कर्मचारियों को अस्थायी तौर पर धान खरीदी की ड्यूटी में लगाया है।
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