आपदा से निपटने की तैयारी पर जोर: एसडीआरएफ ने बाढ़, आग और रेस्क्यू ऑपरेशन का किया लाइव प्रदर्शन
अमलेश्वर में आयोजित मॉक ड्रिल में जवानों ने दिखाए बचाव के गुर, 200 अधिकारियों-कर्मचारियों को दिया आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण
*मानसून और संभावित आपदाओं को देखते हुए दुर्ग संभाग की एसडीआरएफ टीम ने अमलेश्वर स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल तीसरी वाहिनी परिसर में विशेष बाढ़, अग्निकांड और सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस दौरान जवानों ने विभिन्न आपदा परिस्थितियों में त्वरित बचाव और राहत कार्यों का व्यावहारिक प्रदर्शन कर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।*
दुर्ग। आपदा के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एसडीआरएफ संभाग दुर्ग द्वारा छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल तीसरी वाहिनी अमलेश्वर परिसर में विशेष बाढ़, फायर एवं सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वाहिनी के कमांडेंट की उपस्थिति में एसडीआरएफ के प्रशिक्षित जवानों ने विभिन्न आपात परिस्थितियों में किए जाने वाले बचाव कार्यों का जीवंत प्रदर्शन किया।
मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। जवानों ने बताया कि किस प्रकार सीमित संसाधनों के बीच भी त्वरित निर्णय और समन्वय के माध्यम से लोगों की जान बचाई जा सकती है।
कार्यक्रम में डीप डाइविंग ऑपरेशन का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें नदी अथवा जलाशय में डूबे व्यक्ति की तलाश कर उसे बाहर निकालने की तकनीक दिखाई गई। इसके अलावा रेस्क्यू टीम की मोटर बोट पलटने जैसी आपात स्थिति में बचाव कार्य किस प्रकार संचालित किया जाता है, इसका भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
मॉक ड्रिल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्राथमिक उपचार और सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन) का प्रदर्शन रहा। एसडीआरएफ जवानों ने बताया कि डूबे हुए अथवा अचेत व्यक्ति को तत्काल सीपीआर देकर उसकी जान बचाने की संभावना को कैसे बढ़ाया जा सकता है।
इस दौरान आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों का प्रदर्शन भी किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों को इन उपकरणों की कार्यप्रणाली, उपयोगिता और आपदा के समय उनकी भूमिका की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में जिला सेनानी एवं अग्निशमन अधिकारी नागेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में एसडीआरएफ टीम ने आपदा प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में सतर्कता, त्वरित प्रतिक्रिया, समन्वय और सामुदायिक सहयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
मॉक ड्रिल में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल तीसरी वाहिनी अमलेश्वर के लगभग 150 से 200 अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों प्रकार की जानकारी प्रदान की गई।
अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल बचाव दलों की क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि आमजन में भी आपदा के समय सही निर्णय लेने और आत्मविश्वास के साथ कार्य करने की भावना विकसित करना है।
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