मानसून की चाल पड़ी सुस्त, केरल पहुंचने में अब और देरी
श्रीलंका के पास सक्रिय सिस्टम से थमा मानसून, मौसम विभाग ने जताई कम बारिश और ज्यादा गर्मी की आशंका
*देश में मानसून की दस्तक इस बार तय समय से देर से होगी। श्रीलंका के ऊपर बने कम दबाव और तेज हवाओं के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले कई दिनों से अरब सागर में अटका हुआ है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि मानसून अब करीब एक सप्ताह बाद केरल तट पर पहुंचेगा। वहीं जून-जुलाई में कई राज्यों में हीटवेव और सामान्य से कम बारिश की चेतावनी भी जारी की गई है।*
नई दिल्ली (ए)। देशभर में भीषण गर्मी के बीच मानसून का इंतजार और लंबा हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल श्रीलंका के आसपास सक्रिय मौसम प्रणाली और तूफानी हवाओं के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा है। मानसून पिछले पांच दिनों से केरल तट से लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर ठहरा हुआ है।
आमतौर पर मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है। हालांकि, मौसम विभाग ने पहले 26 मई तक इसके आगमन का अनुमान जताया था, लेकिन अब ताजा पूर्वानुमान के अनुसार मानसून करीब सात दिन बाद केरल तट पर पहुंचेगा। यानी पूर्व अनुमान की तुलना में मानसून की एंट्री लगभग 10 दिन देर से होगी।
मौसम विभाग ने इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश की संभावना भी जताई है। विभाग के मुताबिक, देश में इस वर्ष औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश होने का अनुमान है, जो सामान्य औसत से लगभग 10 प्रतिशत कम है। वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में सामान्य औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है।
IMD ने चेतावनी दी है कि जून और जुलाई के दौरान उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। इन इलाकों में सामान्य से करीब 3 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज होने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। वहीं राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा असर देश के मानसून कोर जोन पर पड़ेगा, जहां खेती मुख्य रूप से बारिश पर निर्भर रहती है। इस क्षेत्र में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और उत्तरप्रदेश-बिहार के कुछ हिस्से शामिल हैं। यहां कम बारिश होने से खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
कम बारिश का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा। इससे खाद्यान्न उत्पादन घटने और सब्जियों-दालों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में आय और मांग घटने से ट्रैक्टर, टू-व्हीलर और अन्य उपभोक्ता बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बारिश सामान्य से कम रही तो डैम और जलाशयों का जलस्तर भी प्रभावित होगा, जिससे आगे चलकर पेयजल और बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, लगातार गर्मी के कारण बिजली की खपत में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।
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