रायपुर नगर निगम में ‘भूतिया सफाई कर्मी’ घोटाले का आरोप, RTI खुलासे के बाद मचा हड़कंप
IHRPC ने मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपी जांच रिपोर्ट, 70 वार्डों में फर्जी कर्मचारियों के नाम पर करोड़ों के भुगतान और ठेकेदार-अधिकारियों की साठगांठ का दावा
रायपुर नगर निगम की सफाई व्यवस्था में बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग (IHRPC) ने RTI से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर दावा किया है कि नगर निगम के कई वार्डों में वास्तविक सफाई कर्मचारियों से कहीं अधिक संख्या दिखाकर ठेकेदारों को करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है। आयोग ने इसे “भूतिया कर्मचारी घोटाला” बताते हुए निगम प्रशासन से तत्काल FIR, ब्लैकलिस्टिंग और विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की है।
रायपुर। राजधानी रायपुर की सफाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग (IHRPC) के प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने सूचना के अधिकार (RTI) के जरिए प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर रायपुर नगर निगम में व्यापक वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी भुगतान का आरोप लगाया है। आयोग ने इस संबंध में नगर निगम के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी को विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की है।
आयोग का आरोप है कि नगर निगम के 70 वार्डों में सफाई कार्य के लिए नियुक्त निजी ठेकेदारों और जोन स्वास्थ्य अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के सरकारी फंड का दुरुपयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि निगम रिकॉर्ड में प्रत्येक वार्ड में औसतन 38 सफाई कर्मचारियों का भुगतान दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्तर पर कई वार्डों में 15 से 20 कर्मचारी ही कार्य करते मिले। ऐसे में शेष कर्मचारियों को “भूतिया कर्मचारी” बताते हुए उनके नाम पर फर्जी भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।
प्रदुमन शर्मा ने कहा कि नगर निगम कमिश्नर द्वारा जारी आदेश क्रमांक 544 का कई जोनों में पालन नहीं हो रहा है। RTI के तहत जब जोन स्वास्थ्य अधिकारियों से टेंडर की शर्तों और उनके पालन की जानकारी मांगी गई, तो कई अधिकारियों ने “जानकारी उपलब्ध नहीं” या “निरंक” जवाब दिया। आयोग का कहना है कि यह स्थिति दर्शाती है कि बिना भौतिक सत्यापन और निगरानी के ही ठेकेदारों को लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि टेंडर की कंडिका-15 का उल्लंघन करते हुए सफाई सामग्री की खरीदी राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (NULM) के स्व-सहायता समूहों से न कर निजी स्तर पर की जा रही है, जिससे शासन की मंशा और नियमों की अनदेखी हो रही है।
आयोग ने जोन-09 के स्वास्थ्य अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि सफाई कर्मियों के आईडी कार्ड और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगने पर उन्हें “गोपनीय” और “व्यक्तिगत जानकारी” बताकर देने से इनकार कर दिया गया। आयोग ने इसे RTI कानून की भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि सरकारी धन से होने वाले भुगतान और कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में आती है।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई सफाई कर्मचारियों को ड्रेस, आईडी कार्ड, ईपीएफ और ईएसआईसी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। कई जोन कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति और कटौती से जुड़ा अद्यतन रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं मिला।
IHRPC ने निगम प्रशासन से मांग की है कि पूर्व निरीक्षण रिपोर्ट और पेनाल्टी रिकॉर्ड के आधार पर दोषी ठेकेदारों के खिलाफ वित्तीय गबन और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई करते हुए सभी 70 वार्डों में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। आयोग ने सुबह 6:30 बजे बायोमेट्रिक सत्यापन और लाइव लोकेशन आधारित औचक निरीक्षण की भी मांग की है।
आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे मामले को मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री के समक्ष साक्ष्यों सहित उठाया जाएगा।
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