16 बच्चों के रेस्क्यू के बाद भी कार्रवाई का इंतजार: CWC की रिपोर्ट थाने नहीं पहुंची, बच्चों को लेने आया व्यक्ति पूछताछ के बाद छूटा
दुर्ग बस स्टैंड से काम के नाम पर ले जाए जा रहे बच्चों को किया गया था रेस्क्यू, 7 नाबालिग मिले; पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग एक-दूसरे की रिपोर्ट का कर रहे इंतजार
बाल श्रम और बच्चों की तस्करी की आशंका के बीच दुर्ग बस स्टैंड से 16 बच्चों के रेस्क्यू के मामले में दो दिन बाद भी कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। रेस्क्यू किए गए बच्चों में सात नाबालिग पाए गए हैं। बच्चों को काम दिलाने के नाम पर दूसरे राज्य ले जाने की बात सामने आने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि बाल कल्याण समिति (CWC) की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
दुर्ग। बाल श्रम और बच्चों की तस्करी की आशंका के बीच दुर्ग बस स्टैंड से 16 बच्चों के रेस्क्यू के मामले में फिलहाल कार्रवाई रिपोर्टों के इंतजार में अटकी हुई है। संयुक्त टीम ने दो दिन पहले रायपुर पासिंग बस से बच्चों को रेस्क्यू किया था। जांच में सात बच्चे नाबालिग पाए गए। इसके बावजूद अब तक किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
मामले में बच्चों को रिसीव करने बस स्टैंड पहुंचे एक व्यक्ति से पुलिस ने पूछताछ कर उसका बयान दर्ज किया। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया। पुलिस का कहना है कि बाल कल्याण समिति (CWC) की रिपोर्ट और निर्देश मिलने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
काम के नाम पर दूसरे राज्य ले जाने की बात
रेस्क्यू के दौरान बच्चों से पूछताछ में उन्हें काम दिलाने के नाम पर ले जाने की जानकारी सामने आई थी। कुछ बच्चों ने बताया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में 15 हजार रुपए मासिक वेतन का लालच दिया गया था। वहीं कुछ बच्चों ने मशरूम फैक्ट्री में काम कराने की बात कही थी। इन तथ्यों के सामने आने के बाद भी मामला अभी जांच और विभागीय प्रक्रिया के स्तर पर है।
सात नाबालिगों की सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार
जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) राजकुमार जांबुलकर ने बताया कि सात नाबालिग बच्चों की सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (SIR) तैयार कर भेजी जा चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार बच्चों को उनके परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपराधिक कार्रवाई पुलिस के अधिकार क्षेत्र का विषय है।
पुलिस को अब CWC की रिपोर्ट का इंतजार
पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया के अनुसार अभी तक बाल कल्याण समिति या महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से कोई रिपोर्ट थाने को प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि CWC को न्यायिक शक्तियां प्राप्त हैं और उसके प्रतिवेदन एवं निर्देश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
थाना प्रभारी ने यह भी बताया कि बच्चों को लेने बस स्टैंड पहुंचे व्यक्ति से पूछताछ की गई थी। उसका बयान दर्ज करने के बाद उसे छोड़ दिया गया है। फिलहाल पुलिस संबंधित विभाग की रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रही है।
संयुक्त टीम ने किया था रेस्क्यू
राज्य बाल आयोग से मिली सूचना के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन, एसजेपीयू और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग बस स्टैंड पर कार्रवाई की थी। टीम ने रायपुर जा रही बस में सवार 16 बच्चों को रेस्क्यू किया था। प्रारंभिक जांच में बच्चों के काम के लिए दूसरे स्थान पर ले जाए जाने की बात सामने आई थी।
चाइल्ड हेल्पलाइन के जिला परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल के मुताबिक बच्चों से संबंधित आगे की प्रक्रिया महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस स्तर पर की जानी है। अपराध दर्ज करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का निर्णय संबंधित थाना एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा।
कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
बच्चों को काम के नाम पर दूसरे राज्य ले जाने और नाबालिगों के शामिल होने की पुष्टि के बाद भी एफआईआर नहीं होने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस CWC की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से बच्चों की सामाजिक जांच और संरक्षण संबंधी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
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