RTE में दाखिला टालने वाले निजी स्कूलों पर सख्ती, मान्यता रद्द करने तक की चेतावनी
25% सीट आरक्षण अनिवार्य, छत्तीसगढ़ में प्रतिपूर्ति राशि कई राज्यों से बेहतर
रायपुर। राज्य में शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सरकार ने निजी विद्यालयों पर सख्ती बढ़ा दी है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर प्रवेश देना सभी गैर-अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों के लिए अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित विद्यालयों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।
प्रदेश में यह अधिनियम अप्रैल 2010 से लागू है, जिसके तहत बच्चों को उनके निवास क्षेत्र के भीतर ही निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा को लेकर संवेदनशीलता दिखाते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
प्रतिपूर्ति राशि का पारदर्शी प्रावधान
RTE के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी या कक्षा 1 में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करनी होती हैं। इसके बदले सरकार प्रति छात्र व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि देती है, जो सरकारी स्कूल के खर्च या निजी स्कूल की फीस—दोनों में से जो कम हो—उसके अनुसार तय की जाती है।
अन्य राज्यों से बेहतर व्यवस्था
छत्तीसगढ़ में कक्षा 1 से 5 तक प्रति छात्र 7,000 रुपये और कक्षा 6 से 8 तक 11,400 रुपये वार्षिक प्रतिपूर्ति दी जाती है। यह राशि मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की तुलना में अधिक या बेहतर मानी जा रही है, जबकि कुछ राज्यों में यह अधिक जरूर है, लेकिन समग्र रूप से छत्तीसगढ़ की व्यवस्था संतुलित और व्यवहारिक है।
लाखों छात्रों को मिल रहा लाभ
वर्तमान में राज्य के 6,862 निजी विद्यालयों में लगभग 3 लाख 63 हजार 515 विद्यार्थी RTE के तहत शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस शैक्षणिक सत्र में भी कक्षा पहली की करीब 22 हजार सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।
उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई तय
शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई निजी विद्यालय प्रवेश देने से इंकार करता है या प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता समाप्त करना भी शामिल है।
अफवाहों से रहें सतर्क
विभाग ने अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे RTE से संबंधित किसी भी भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
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