चश्मा बनेगा पेमेंट मशीन, रोबोट बताएगा दांतों की बीमारी

IMC-2026 में AI तकनीक का प्रदर्शन, 30 मिनट में हेल्थ रिपोर्ट और खतरनाक इलाकों में काम करने वाले रोबोट भी चर्चा में

चश्मा बनेगा पेमेंट मशीन, रोबोट बताएगा दांतों की बीमारी

नई दिल्ली (ए)। कल्पना कीजिए कि भुगतान करने के लिए मोबाइल निकालने की जरूरत न पड़े, स्वास्थ्य जांच की रिपोर्ट आधे घंटे में फोन पर मिल जाए और दांतों की शुरुआती बीमारी का पता महज एक मिनट में चल सके। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में प्रदर्शित नई तकनीकें इन संभावनाओं को सामने ला रही हैं। रिलायंस जियो के AI स्मार्टग्लास, क्योरबे के हेल्थ कियोस्क, डेंटल रोबोट, ड्रोनास्त्र और क्वालकॉम के रोबोटिक आर्म ने तकनीक के बदलते स्वरूप की झलक दिखाई।

बिना फोन निकाले भुगतान की सुविधा

रिलायंस जियो का AI स्मार्टग्लास इस प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा। इसमें UPI भुगतान और लाइव वॉइस ट्रांसलेशन जैसी सुविधाएं बताई गई हैं। इसका उद्देश्य स्मार्टफोन पर निर्भरता कम करते हुए चश्मे के जरिए डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल आसान बनाना है। इसे ऑडियो ओनली और कैमरा मॉडल में पेश किया गया है। कंपनी ने कीमत को भारतीय उपभोक्ताओं के अनुकूल रखने की बात कही है, हालांकि विस्तृत स्पेसिफिकेशन और कीमत की घोषणा अभी बाकी है।

एक मशीन में 80 से ज्यादा स्वास्थ्य जांच

क्योरबे का केयर कियोस्क स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण है। यह एक स्मार्ट हेल्थ ATM की तरह काम करता है। इसमें ब्लड प्रेशर, शुगर, हीमोग्लोबिन और लिवर प्रोफाइल सहित 80 से ज्यादा जांचों की सुविधा बताई गई है। कंपनी के मुताबिक, AI और सेंसर आधारित व्यवस्था के जरिए करीब 30 मिनट में डिजिटल रिपोर्ट मोबाइल पर उपलब्ध हो सकती है। इससे प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा अस्पतालों के अलावा अन्य सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचाने की संभावना बनती है।

60 सेकंड में दांतों की जांच

डेंटल रोबोटिक कियोस्क में रोबोटिक आर्म, कैमरे और स्कैनिंग सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। यह मुंह के अंदर की तस्वीरें और स्कैन लेकर दांतों की सड़न, प्लाक तथा मसूड़ों की सूजन जैसे संकेत पहचानने में मदद करता है। इसकी खासियत करीब एक मिनट में रिपोर्ट तैयार करने का दावा है। रिपोर्ट स्क्रीन पर दिखाने और वॉट्सऐप के जरिए भेजने की सुविधा भी बताई गई है। हालांकि, यह तकनीक शुरुआती जांच में मदद कर सकती है, लेकिन उपचार का निर्णय दंत चिकित्सक की सलाह के आधार पर ही होना चाहिए।

ड्रोन से ड्रोन का मुकाबला

सुरक्षा के क्षेत्र में ड्रोनास्त्र को संभावित खतरनाक ड्रोन की पहचान और उन्हें निष्क्रिय करने वाली तकनीक के रूप में प्रदर्शित किया गया। इसमें AI आधारित पहचान और ड्रोन के संचार संकेतों को बाधित करने जैसी क्षमताओं का उल्लेख किया गया है। कुछ प्रणालियों में खतरे को रोकने के लिए दूसरे ड्रोन का इस्तेमाल भी किया जाता है। ऐसी तकनीक सीमा सुरक्षा, संवेदनशील प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इसकी सटीक कार्यप्रणाली और परिचालन क्षमता के बारे में स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

इंसानों के लिए जोखिम वाले काम करेगा रोबोट

क्वालकॉम का ओपन आर्म रोबोटिक सिस्टम इंसानी हाथ और बाजू जैसी गतिविधियां करने के लिए बनाया गया है। AI प्लेटफॉर्म और चिपसेट की मदद से संचालित यह तकनीक उन कामों में उपयोगी हो सकती है, जहां भारी मशीनों, खतरनाक रसायनों या जोखिम भरे वातावरण में काम करना पड़ता है। औद्योगिक उत्पादन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में ऐसे रोबोट मानव सुरक्षा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

IMC-2026 में सामने आए ये इनोवेशन बताते हैं कि तकनीक अब केवल स्मार्टफोन और इंटरनेट तक सीमित नहीं है। डिजिटल भुगतान से लेकर शुरुआती स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा तक, AI आधारित उपकरण कई क्षेत्रों में बदलाव की संभावना पैदा कर रहे हैं। इनका व्यापक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि ये तकनीकें कितनी सुरक्षित, सटीक, किफायती और आम लोगों के लिए सुलभ बन पाती हैं।