छत्तीसगढ़ी सिनेमा में पहली बार क्राइम थ्रिलर – खारुन पार से दर्शकों को नया अनुभव

युवा निर्देशक दिव्यांश सिंह की बहुप्रतीक्षित फिल्म, 12 सितंबर को रिलीज; शील वर्मा, एल्सा घोष, राया डिंगोरिया और विशाल दुबे सहित कई कलाकार नजर आएंगे नए रूप में

छत्तीसगढ़ी सिनेमा में पहली बार क्राइम थ्रिलर – खारुन पार से दर्शकों को नया अनुभव

छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री, जो अब तक प्रेम और पारिवारिक कहानियों तक सीमित मानी जाती थी, अब एक नए प्रयोग की ओर बढ़ रही है। युवा निर्देशक दिव्यांश सिंह की फिल्म खारुन पार प्रदेश के दर्शकों को पहली बार क्राइम थ्रिलर की दुनिया में ले जाएगी। महादेव घाट और खारुन नदी के इर्द-गिर्द बुनी गई यह फिल्म सस्पेंस, ड्रामा और भावनाओं का अनोखा संगम है, जिसकी रिलीज का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ी सिनेमा अब बदलाव के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश के दर्शक पहली बार क्राइम थ्रिलर के रंग देखने जा रहे हैं। निर्देशक दिव्यांश सिंह की फिल्म खारुन पार इसी बदलाव की नई शुरुआत है। यह फिल्म 12 सितंबर को छत्तीसगढ़ के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

फिल्म की कहानी रायपुर की जीवनधारा मानी जाने वाली खारुन नदी और महादेव घाट के इर्द-गिर्द बुनी गई है। इसमें रहस्य और थ्रिल के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की संस्कृति और जड़ों को भी खूबसूरती से दिखाया गया है।

इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है इसकी यंग स्टारकास्ट। लोकप्रिय अभिनेत्री एल्सा घोष और अभिनेता शील वर्मा की जोड़ी पहली बार बड़े परदे पर साथ नजर आएगी। इनके अलावा राया डिंगोरिया, विशाल दुबे और कॉमेडियन अमन सागर भी अपनी अदाकारी से दर्शकों को लुभाएंगे।

फिल्म का निर्माण इनसाइड मी ओरिजिनल्स बैनर के तहत हुआ है। खास बात यह है कि इसके निर्माता-निर्देशक और पूरी टीम ज्यादातर इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स हैं, जिन्होंने तकनीकी पढ़ाई के बाद फिल्ममेकिंग को अपना करियर चुना। इससे पहले यही टीम सरकारी अफसर नामक वेब सीरीज बना चुकी है, जिसे यूट्यूब पर लाखों व्यूज़ मिले थे।

फिल्म खारुन पार को लेकर कलाकारों में भी उत्साह है। शील वर्मा का कहना है कि यह फिल्म बाकी छत्तीसगढ़ी फिल्मों से अलग है और अगर इसे हिंदी में ओटीटी पर रिलीज किया जाए तो यह बड़ी हिट साबित हो सकती है। वहीं एल्सा घोष मानती हैं कि सिनेमा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार और निर्देशकों को गंभीरता से काम करना होगा।

इस फिल्म में विशेष भूमिका निभा रहे क्रांति दीक्षित का मानना है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज से संवाद करने का जरिया भी है। उनका कहना है कि अगर सरकार छत्तीसगढ़ी सिनेमा को उचित सहयोग दे, तो यह इंडस्ट्री भी साउथ की तरह ऊंचाइयों को छू सकती है।