नक्सलमुक्त गांवों में तिरंगे की नई शुरुआत: भाजपा का विशेष अभियान 11 से 15 अगस्त तक
तीन दशक बाद कई गांवों में पहली बार फहरेगा राष्ट्रीय ध्वज, आत्मसमर्पित नक्सलियों और शहीद परिवारों की भी होगी भागीदारी
रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी इस बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को नक्सलमुक्त गांवों तक विशेष रूप से पहुंचाने की तैयारी में है। पार्टी ऐसे गांवों की सूची तैयार कर रही है, जहां पिछले लगभग तीन दशकों से राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया गया। इन क्षेत्रों में विशेष तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी और स्थानीय लोगों के साथ आत्मसमर्पित नक्सलियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी। अभियान 11 से 15 अगस्त तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष फोकस
पार्टी संगठन ने जिला और मंडल इकाइयों को निर्देश दिया है कि हाल के वर्षों में नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए गांवों में तिरंगा फहराने और तिरंगा यात्रा आयोजित करने की विशेष तैयारी की जाए। इसे मुख्यधारा से जुड़ाव और सामान्य जनजीवन की वापसी का प्रतीक माना जा रहा है।
मंडल स्तर पर निकलेगी भव्य तिरंगा यात्रा
हर घर तिरंगा अभियान के तहत प्रत्येक जिला मुख्यालय और मंडल केंद्र पर भव्य तिरंगा यात्राएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही हर मंडल के कम से कम पांच प्रमुख गांवों या बाजार क्षेत्रों में भी तिरंगा यात्रा निकालने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में भाजपा युवा मोर्चा की प्रमुख भूमिका रहेगी।
छात्र, महिलाएं और सुरक्षा बल भी होंगे शामिल
पार्टी ने स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों, महिला समूहों, सेवानिवृत्त सैनिकों और सुरक्षा बलों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। जिला मुख्यालयों में युवतियों की बाइक तिरंगा यात्रा भी आयोजित करने की योजना बनाई गई है।
शहीद परिवारों का होगा सम्मान
अभियान के दौरान शहीद सैनिकों और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों के परिजनों का सम्मान किया जाएगा। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शहीद परिवारों को तिरंगा भेंट कर उन्हें श्रद्धांजलि देने का कार्यक्रम रखा गया है।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भी मनाएगी भाजपा
भाजपा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाएगी। इस अवसर पर जिलों में मौन जुलूस निकाले जाएंगे और विभाजन का दंश झेल चुके परिवारों से पार्टी नेता मुलाकात कर उनकी स्मृतियों को साझा करेंगे।
तिरंगा फहराना बदलाव का प्रतीक
बस्तर और सुदूर ग्रामीण इलाकों में लंबे समय तक नक्सलियों के प्रभाव के कारण कई गांवों में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाता था। हाल के वर्षों में सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क संपर्क के विस्तार और विकास योजनाओं के बढ़ने से कई क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुंच मजबूत हुई है। ऐसे में नक्सलमुक्त गांवों में तिरंगा यात्रा और ध्वजारोहण को केवल उत्सव नहीं, बल्कि सरकारी व्यवस्था की वापसी और सामाजिक-मानसिक बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
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