नागलोक समेत छत्तीसगढ़ में सर्पदंश से 700 से ज्यादा मौतें, 9 दिनों में 5 की गई जान, डॉक्टरों ने दिया बचाव का मंत्र

नागलोक समेत छत्तीसगढ़ में सर्पदंश से 700 से ज्यादा मौतें, 9 दिनों में 5 की गई जान, डॉक्टरों ने दिया बचाव का मंत्र

आंबेडकर व निजी अस्पतालों में पिछले 9 दिनों में सर्पदंश के 30 से ज्यादा केस आए हैं। इनमें 5 मरीजों की मौत भी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार जून से अगस्त तक सर्पदंश के केस ज्यादा आते हैं।

बारिश का सीजन शुरू होते ही राजधानी समेत ग्रामीण इलाकों से सर्पदंश के केस आना शुरू हो गया है। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में सर्पदंश से हर साल 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।

दरअसल लोग तत्काल अस्पताल जाने के बजाय बैगा-गुनिया से झाड़-फूंक करवाते हैं, जो ज्यादातर मामले में मौत की वजह बन रही है। डाॅक्टरों के अनुसार सांप के डंसने के बाद दो घंटे में अस्पताल पहुंच जाएं तो ऐसे मामले में 90 फीसदी लोगों की जान बच जाती है। सीजीएमएससी के अधिकारियों के अनुसार अभी अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में एंटी वेनम इंजेक्शन का स्टॉक है।

पिछले 9 दिनों में सर्पदंश के 30 से ज्यादा केस

प्री मानसून बारिश शुरू होते ही जहरीले सांप बिलों से बाहर आकर रिहायशी इलाकों में आने लगे हैं। आंबेडकर व निजी अस्पतालों में पिछले 9 दिनों में सर्पदंश के 30 से ज्यादा केस आए हैं। इनमें 5 मरीजों की मौत भी हुई है। डॉक्टरों के अनुसार जून से अगस्त तक सर्पदंश के केस ज्यादा आते हैं। दरअसल इस दौरान खेती का काम भी चलता है। विशेषज्ञों के अनुसार सभी सांप जहरीले नहीं होते। कई केस में घबराहट में लोगों की जान चली जाती है। लक्षण के अनुसार डॉक्टर इस बात का अंदाजा लगा लेते हैं कि किस सांप ने डंसा होगा।

जशपुर को कहा जाता है नागलोग

प्रदेश के जशपुर को नागलोक कहा जाता है। वहां सर्पदंश के सबसे ज्यादा केस फरसाबहार में आता है। पत्थलगांव, बगीचा, कांसाबेल, जशपुर, मनोरा व दुलदुला अस्पतालों में सर्पदंश के काफी केस पहुंचते हैं। इसमें कई मरीजों को एंटी वेनम इंजेक्शन लगाने से जान बच जाती है। झाड़-फूंक के चक्कर में कई लोगों की जान भी चली जाती है।

कोबरा-करैत का जहर जानलेवा, मरीजों को वेंटीलेटर की जरूरत

प्रदेश में पाए जाने वाले कोबरा व करैत का जहर जानलेवा होता है। इलाज में जरा सी देरी पर जान चली जाती है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों सांपों के जहर से फेफड़े काम करने बंद कर देते हैं। ऐसे में मरीज को कृत्रिम सांस देने के लिए जीवनरक्षक मशीन वेंटीलेटर की जरूरत पड़ती है। हाथ-पैर भी काम करना बंद कर देता है। आंखें बंद होने लगती है। डॉक्टरों के अनुसार ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन भी 65 से कम चला जाता है। ऐसे केस में मरीज को वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखना जरूरी है।

सांप डंसे तो ये करें

सांप जहां पर डंसा हो, वहां कपड़े बांध दें लेकिन ज्यादा टाइट नहीं।

सर्पदंश वाली जगह पर छेड़छाड़ न करें। यानी कांटे-छांटे नहीं।

दो घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने पर जान बचने की संभावना 90 फीसदी से ज्यादा।

मरीज की हिम्मत बढ़ाएं, न कि डराएं।

पीड़ित को सोने न दें व गरम चाय पिलाते रहें।

ये काम बिल्कुल न करें

घबराहट न लाएं। डरें नहीं।

इधर-उधर न जाएं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ने से शरीर में जहर फैलता है।

न आंख बंद करें और न ही सोने जाएं।

बैगा-गुनिया के पास न जाएं, सीधे अस्पताल जाएं।

बारिश के सीजन में जमीन पर न सोएं।

खेतों में काम करे तो अलर्ट रहें।

घर में सांप न जाए इसलिए ये करें

दरवाजे व खिड़कियों पर फिनाइल या मिट्टी तेल का छिड़काव करें।

सांपों के छिपने की जगह झाड़ियों व कबाड़ को साफ करें।

घर में चूहों पर नियंत्रण रखें, क्योंकि सांप का यह मुख्य भोजन है।

घर के सभी दरारों व छेद को अच्छी तरह से बंद करें।

टॉपिक एक्सपर्ट

सर्पदंश के कारण फेफड़े फेल (रेस्पिरेटरी फेल्योर) होना इमरजेंसी की स्थिति होती है। इस दौरान सांस लेने में दिक्कत होती है और शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। कोबरा व करैत जैसे जहरीले सांपों का जहर श्वसन तंत्र की मांसपेशियों को पैरालिसिस कर सकता है। फेफड़ों में सूजन भी हो सकती है। ऐसे में पीड़ित को तत्काल एंटी वेनम इंजेक्शन लगाने व वेंटीलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। - डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल

जहरीले सांप के डंसने के बाद बैगा-गुनिया के पास झाड़-फूंक कराने में समय बर्बाद न करें। दो घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच जाएं तो मरीज को एंटी वेनम का डोज लगने के बाद जहर का असर कम होने लगता है। ऐसे मामले में 90 फीसदी से ज्यादा मरीजों की जान बचाई गई है। इससे स्पष्ट है कि समय पर अस्पताल पहुंचने व इलाज होने से सर्पदंश के मामले में काफी लोगों की जान बच जाती है। - डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, प्रोफेसर मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल