दुर्ग में सरपंचों का शक्ति प्रदर्शन: 17 मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे 200 जनप्रतिनिधि, 30 दिन का दिया अल्टीमेटम

पंचायतों को वित्तीय अधिकार, मानदेय वृद्धि और विकास कार्यों में स्वायत्तता की मांग; कार्रवाई नहीं होने पर अनशन और आंदोलन की चेतावनी

दुर्ग में सरपंचों का शक्ति प्रदर्शन: 17 मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे 200 जनप्रतिनिधि, 30 दिन का दिया अल्टीमेटम

ग्राम पंचायतों के अधिकार, विकास कार्यों में आ रही बाधाओं और वित्तीय समस्याओं को लेकर दुर्ग जिले के करीब 200 सरपंच सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिला सरपंच संघ के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा गया। सरपंचों ने स्पष्ट किया कि यदि एक माह के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो जिलेभर में चरणबद्ध आंदोलन, अनशन और शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।

दुर्ग-भिलाई। ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सोमवार को दुर्ग जिले के सरपंचों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। जिला सरपंच संघ के बैनर तले दुर्ग, धमधा और पाटन विकासखंड के लगभग 200 सरपंच एकत्र हुए और प्रशासन को 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए 30 दिनों के भीतर कार्रवाई की मांग की।

सरपंच संघ के जिला अध्यक्ष विनय चंद्राकर ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं और वित्तीय प्रतिबंधों के कारण ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने पंचायतों को अधिक वित्तीय स्वायत्तता देने तथा 50 लाख रुपये तक के विकास कार्य सीधे ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाने की मांग उठाई। उनका कहना है कि इससे ठेकेदारी व्यवस्था पर निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता के साथ विकास कार्यों में तेजी आएगी।

ज्ञापन में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 से जुड़े कई सुझाव भी दिए गए हैं। सरपंचों ने अपात्र हितग्राहियों के पुनर्मूल्यांकन, आवास निर्माण की सहायता राशि 2.50 लाख रुपये किए जाने तथा भूमि की कमी वाले पात्र परिवारों को प्रथम मंजिल पर आवास निर्माण की अनुमति देने की मांग की।

सरपंच संघ ने 16वें वित्त आयोग की राशि में जिला एवं जनपद स्तर पर की जा रही 10-10 प्रतिशत कटौती समाप्त कर पूरी राशि सीधे ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराने की मांग भी रखी। साथ ही आबादी के वर्तमान आंकड़ों के आधार पर राशि का वितरण करने का आग्रह किया गया।

ज्ञापन में गौठानों के विकास, गौधाम योजना लागू करने, आवारा पशुओं के संरक्षण के लिए अलग बजट, घास भूमि को आबादी भूमि घोषित कर पात्र परिवारों को पट्टा देने तथा जल जीवन मिशन के कार्यों में ग्राम पंचायत से पूर्णता प्रमाण पत्र अनिवार्य किए जाने जैसी मांगें भी शामिल हैं।

जिला पदाधिकारी जानकी चौपड़िया ने कहा कि ग्रामीणों से जुड़े जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जॉब कार्ड, नामांतरण सहित अन्य राजस्व संबंधी कार्यों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

सरपंच संघ ने जनप्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की भी मांग की है। ज्ञापन में सरपंचों का मानदेय 20 हजार रुपये, उपसरपंचों का 5 हजार रुपये तथा पंचों का 2 हजार रुपये प्रतिमाह करने के साथ ही पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले सरपंचों को 5 हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग की गई है।

सरपंच संघ ने प्रशासन को 30 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि में मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो जिलेभर के सरपंच लोकतांत्रिक तरीके से अनशन, धरना और शक्ति प्रदर्शन करेंगे। संघ ने कहा कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

ज्ञापन की प्रतियां केंद्रीय पंचायती राज मंत्री, केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री, छत्तीसगढ़ के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, संबंधित सांसद-विधायकों तथा जिला एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी भेजी गई हैं।