मिलावटी शराब पीने से युवक की मौत, शव देखकर मां ने भी तोड़ा दम, सरगुजा में एक साथ उठीं दो अर्थियां

मिलावटी शराब पीने से युवक की मौत, शव देखकर मां ने भी तोड़ा दम, सरगुजा में एक साथ उठीं दो अर्थियां

उलकिया गांव में मां-बेटे की एक साथ मौत से शोक की लहर फैल गई है। बताया जा रहा है कि रोजगार की तलाश में पुणे गए 35 वर्षीय युवक की कथित तौर पर मिलावटी शराब पीने से मौत हो गई।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले के उलकिया गांव में एक ही परिवार पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि पूरे गांव की आंखें नम हो गईं। रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र के पुणे गए एक युवक की कथित तौर पर मिलावटी शराब पीने से मौत हो गई। जब उसका शव गांव पहुंचा तो जवान बेटे की मौत का सदमा उसकी मां बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसने भी दम तोड़ दिया। मां-बेटे की एक साथ मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

जानें पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, उलकिया गांव निवासी 35 वर्षीय राजेंद्र टोप्पो अपने परिवार का इकलौता सहारा था। वर्षों पहले पिता के निधन के बाद घर की सारी जिम्मेदारियां उसके कंधों पर आ गई थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी और गांव में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण वह पत्नी एवं दो साल के बेटे समेत छह महीने पहले गांव छोड़कर रोजगार की तलाश में पुणे चला गया था। वहां पति-पत्नी दोनों मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे।

मिलावटी शराब का किया था सेवन

बताया जा रहा है कि 26 और 27 मई के दौरान राजेंद्र ने कथित तौर पर मिलावटी शराब का सेवन कर लिया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया। राजेंद्र जहां काम करता था, वहां के सहयोगियों ने उसके शव को एम्बुलेंस के जरिए उसके पैतृक गांव उलकिया भिजवाया।

शव देख सदमे में मां ने भी तोड़ा दम

जब राजेंद्र का शव गांव पहुंचा तो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे की मौत की खबर पहले ही उसकी 55 वर्षीय मां सुखमनिया को गहरे सदमे में डाल चुकी थी। ग्रामीणों के अनुसार, वह पहले से बीमार रहती थीं। जैसे ही उन्होंने अपने जवान बेटे का शव देखा, उनकी हालत और बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

एक ही घर से मां और बेटे की अर्थी उठने का दृश्य देखकर गांव का माहौल गमगीन हो गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव की मौजूदगी में मां और बेटे का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया। इस हृदयविदारक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।

पत्नी और दो साल का मासूम बेटा बेसहारा

राजेंद्र की मौत के बाद उसकी पत्नी और दो साल का मासूम बेटा बेसहारा हो गए हैं। परिवार के सामने अब आर्थिक संकट के साथ-साथ भविष्य की बड़ी चुनौती भी खड़ी हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध होते तो राजेंद्र को परिवार सहित पलायन नहीं करना पड़ता।

ग्रामीणों ने बताया कि रोजगार की कमी के कारण क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जाने को मजबूर हैं। मनरेगा जैसी योजनाओं का उद्देश्य गांवों में रोजगार उपलब्ध कराकर पलायन रोकना है, लेकिन कई जगहों पर निर्माण कार्य ठप पड़े होने से लोगों को काम नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मजबूरी में ग्रामीणों को अपने परिवार के साथ दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है।