खराब तैयारी का असर, कॉमनवेल्थ जेवलिन में अरशद नदीम नौवें स्थान पर

कोच ने स्वीकारा- पर्याप्त अभ्यास नहीं हो पाया; फेडरेशन से सहयोग घटने की रिपोर्ट, विदेशी प्रशिक्षण भी नहीं मिला

खराब तैयारी का असर, कॉमनवेल्थ जेवलिन में अरशद नदीम नौवें स्थान पर

स्पोर्ट्स डेस्क। पाकिस्तान के ओलिंपिक चैंपियन जेवलिन थ्रोअर अरशद नदीम ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सके। प्रतियोगिता में वह 80 मीटर का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए और नौवें स्थान पर रहे। उनके कोच सलमान बट ने हार के बाद स्वीकार किया कि टीम की तैयारी पर्याप्त नहीं थी और खिलाड़ी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रतियोगिता से पहले पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स फेडरेशन (PAAF) ने नदीम की तैयारी से लगभग दूरी बना ली थी। इसके कारण उन्हें अधिकांश प्रशिक्षण अपने स्तर पर करना पड़ा और आवश्यक सहयोग समय पर उपलब्ध नहीं हो सका।

कोचिंग विवाद के बाद कम हुआ संस्थागत सहयोग

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पिछले वर्ष कोचिंग व्यवस्था को लेकर मतभेद सामने आने के बाद फेडरेशन ने नदीम के प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा समर्थन नहीं दिया। उनकी तैयारी से जुड़े कई अनुरोध लंबित रहे, जबकि पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड विदेशी कोच और ट्रेनर उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता भी जारी नहीं कर सका।

विदेशी प्रशिक्षण की जगह लाहौर में अभ्यास

ओलिंपिक स्वर्ण पदक जीतने से पहले अरशद नदीम ने दक्षिण अफ्रीका के कोच टेर्सियस लीबेनबर्ग के मार्गदर्शन में विदेश में प्रशिक्षण लिया था। हालांकि इस बार उन्होंने लाहौर में अपने पुराने कोच सलमान बट और स्थानीय प्रशिक्षकों के साथ ही अभ्यास किया, जिससे उनकी तैयारी सीमित रही।

भारतीय खिलाड़ियों से तुलना

प्रतियोगिता में भारत के नीरज चोपड़ा ने रजत और यशवीर सिंह ने कांस्य पदक जीता। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि नीरज ने स्विट्जरलैंड में अपना अंतिम प्रशिक्षण चरण पूरा किया, जबकि यशवीर सिंह और रोहित यादव ने पोलैंड में विदेशी कोचों के साथ अभ्यास किया। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर अंतरराष्ट्रीय तैयारी का असर परिणामों में स्पष्ट दिखाई दिया।

पूर्व अधिकारियों ने भी उठाए सवाल

अरशद नदीम के कोच सलमान बट ने कहा कि खिलाड़ी पूरी तरह तैयार नहीं था और तैयारी के स्तर ने प्रदर्शन को प्रभावित किया। पाकिस्तान एथलेटिक्स फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष अकरम साही ने भी खराब तैयारी और लापरवाही को प्रदर्शन में गिरावट का प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि ओलिंपिक स्वर्ण के बाद नदीम के प्रशिक्षण तंत्र में व्यवधान आया और पिछले कई महीनों से अभ्यास में निरंतरता की कमी दिखाई दे रही थी।

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की जेवलिन स्पर्धा में श्रीलंका के रुमेश पाथिरागे ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारतीय खिलाड़ियों ने दो पदक अपने नाम किए।