मासूम भतीजी की हत्या के दोषी चाचा को फांसी
17 महीने में आया फैसला; कन्या पूजन के दिन बच्ची को छत के अधूरे कमरे में ले गया था आरोपी, बाद में पड़ोसी की कार में छिपाया शव
दुर्ग-भिलाई। दुर्ग जिले में छह साल की भतीजी से दुष्कर्म और उसकी हत्या के मामले में कोर्ट ने उसके सगे चाचा को फांसी की सजा सुनाई है। मोहन नगर थाना क्षेत्र के इस मामले में करीब 17 महीने की सुनवाई और जांच के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने 6 अप्रैल 2025 को बच्ची को घर की छत पर बने अधूरे कमरे में ले जाकर वारदात को अंजाम दिया था। इसके बाद बच्ची को मृत समझकर पड़ोसी की कार की डिक्की में छिपा दिया।
घटना के बाद आरोपी काफी देर तक परिवार और पुलिस के साथ बच्ची की तलाश में शामिल होने का दिखावा करता रहा। वह बार-बार कार के पास जाता रहा। पुलिस को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ तो कार की डिक्की की तलाशी ली गई। बच्ची उसमें मिली। उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
पहले गुमराह करता रहा, पूछताछ में खुला राज
बच्ची के मिलने के बाद पुलिस ने संदेह के आधार पर चाचा को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान वह लगातार पुलिस को अलग-अलग जानकारी देकर गुमराह करता रहा। सख्ती से पूछताछ के बाद उसने अपराध स्वीकार किया।
शुरुआत में बच्ची के परिजनों ने आरोपी को फंसाए जाने की आशंका जताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पुलिस ने मामले को केवल बयान के आधार पर आगे बढ़ाने के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जांच केंद्रित की।
DNA और वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 10 सदस्यीय SIT गठित की थी। टीम ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, CCTV फुटेज, DNA जांच और गवाहों के बयानों को जांच का आधार बनाया। पुलिस की जांच में आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए और इन्हीं के आधार पर अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया।
पुलिस के मुताबिक जांच पूरी कर चालान पेश किए जाने के बाद मामले की सुनवाई तेजी से आगे बढ़ी और करीब 17 महीने में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई।
कन्या पूजन के लिए पहुंची थी बच्ची
6 अप्रैल 2025 की सुबह करीब 8 बजे बच्ची अपनी बुआ-दादी के घर पहुंची थी। उस दिन घर में कन्या पूजा की तैयारी चल रही थी। परिवार की महिलाएं पूजा और रसोई के काम में व्यस्त थीं। इसी दौरान घर में मौजूद 24 वर्षीय चाचा बच्ची को बहला-फुसलाकर छत पर बने अधूरे कमरे की ओर ले गया।
पुलिस जांच के अनुसार वहीं उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। बाद में शव को पड़ोसी की कार की डिक्की में रख दिया गया।
करीब 10 बजे बच्ची कन्या भोज में शामिल हुई थी। इसके बाद दूसरे बच्चे वहां से चले गए, लेकिन बच्ची घर वापस नहीं पहुंची। परिवार को जब उसके लापता होने का पता चला तो तलाश शुरू की गई।
CCTV और बच्चों से पूछताछ से मिली अहम जानकारी
बच्ची के माता-पिता पास ही किराए के मकान में रहते थे। दोपहर बाद जब बच्ची घर नहीं पहुंची तो परिजनों ने आसपास तलाश की। शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच वे थाने पहुंचे और बच्ची के लापता होने की सूचना दी।
पुलिस ने तत्काल टीम बनाकर तलाश शुरू की। आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई। कन्या भोज में बच्ची के साथ मौजूद दूसरे बच्चों से भी जानकारी ली गई। जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि बच्ची अपनी दादी के घर से अन्य बच्चों के साथ बाहर निकली ही नहीं थी।
इसके बाद पुलिस ने घर और आसपास मौजूद लोगों की गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया। जांच आगे बढ़ने पर चाचा संदेह के घेरे में आया और पूछताछ के बाद मामले की कड़ियां जुड़ती चली गईं।
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