कमर तक पानी और कीचड़ के बीच निकली अंतिम यात्रा, 30-40 ग्रामीणों ने दिया शव को कंधा

सेमरिया गांव में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें, श्मशान घाट तक पहुंचने का डेढ़ किमी रास्ता बदहाल; ग्रामीण बोले- ऐसी सड़क हो कि अंतिम विदाई में न करना पड़े संघर्ष

कमर तक पानी और कीचड़ के बीच निकली अंतिम यात्रा, 30-40 ग्रामीणों ने दिया शव को कंधा

दुर्ग-भिलाई। दुर्ग जिले के सेमरिया गांव में बारिश के दौरान बदहाल सड़क लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। हाल ही में एक ग्रामीण की अंतिम यात्रा के दौरान परिजनों और ग्रामीणों को शव लेकर कमर तक भरे पानी और कीचड़ से होकर श्मशान घाट तक पहुंचना पड़ा। करीब 30 से 40 लोगों ने बारी-बारी से शव को कंधा दिया। रास्ते में कीचड़ के कारण कई लोग फिसलकर गिर पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते की हालत वर्षों से ऐसी ही है, लेकिन बारिश के दिनों में स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है।

नाले के पास बढ़ जाता है पानी, डेढ़ किमी रास्ता बन जाता है दलदल

ग्रामीणों के मुताबिक बागडूमर से सेमरिया गांव की दूरी करीब 4 किलोमीटर है। बारिश में इस मार्ग पर जगह-जगह पानी भर जाता है और बड़े-बड़े गड्ढों के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। सबसे खराब स्थिति श्मशान घाट तक पहुंचने वाले अंतिम करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से की है। नाले के आसपास पानी का स्तर बढ़ जाने से लोगों को कई बार कमर तक पानी पार करना पड़ता है।

हाल की अंतिम यात्रा में भी ग्रामीणों को इसी मुश्किल का सामना करना पड़ा। शव को पानी और कीचड़ से निकालते हुए आगे बढ़ाना पड़ा। रास्ता इतना फिसलन भरा था कि अंतिम यात्रा में शामिल कई लोग गिर गए।

श्मशान घाट में शेड बना, लेकिन वहां तक पहुंचने का रास्ता नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान घाट में बारिश और धूप से बचने के लिए शेड बनाया गया है, लेकिन शेड तक पहुंचना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। बरसात में सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है। ऐसे में शव को वहां तक ले जाना बेहद कठिन हो जाता है।

ग्रामीण रामअवतार यादव के मुताबिक हाल ही में उन्होंने अंतिम यात्रा के दौरान की स्थिति देखी। शुरुआत में शव को सामान्य तरीके से कंधा देकर ले जाया जा रहा था, लेकिन श्मशान घाट के पास पहुंचते ही रास्ता बेहद खराब हो गया। कई स्थानों पर लोगों को संभलकर आगे बढ़ना पड़ा और शव को उठाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मदद लेनी पड़ी।

बचपन से यही सड़क देख रहे हैं, अब तक नहीं बदली तस्वीर’

रामअवतार यादव ने कहा कि उनकी उम्र करीब 32 वर्ष है और बचपन से गांव की सड़क की यही स्थिति देखते आ रहे हैं। उनका कहना है कि कई बार सड़क निर्माण की मांग जनप्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों के सामने रखी गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से केवल सामान्य आवागमन ही आसान नहीं होगा, बल्कि बरसात के दिनों में मरीजों, बुजुर्गों, विद्यार्थियों और जरूरतमंद लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

500 की आबादी, बारिश में गांव से बाहर निकलना भी मुश्किल

सेमरिया गांव की आबादी करीब 500 बताई गई है। गांव में आदिवासी गोंड समाज के लोगों की संख्या अधिक है। ग्रामीणों के अनुसार बागडूमर से गांव तक पहुंचने वाला करीब 4 किलोमीटर का मार्ग भी बरसात में खराब हो जाता है।

युवा तन्नू सोरी ने बताया कि गांव के कई युवा पढ़ाई और कंप्यूटर की कक्षाओं के लिए अहिवारा जाते हैं। बारिश के मौसम में सड़क पर पानी और कीचड़ के कारण उन्हें काफी परेशानी होती है। साइकिल फिसलने और पंचर होने की घटनाएं भी होती रहती हैं।

भिलाई से सिर्फ 20 किमी दूर, फिर भी सड़क की हालत ऐसी’

ग्रामीणों का कहना है कि सेमरिया कोई अत्यंत दूरस्थ या दुर्गम क्षेत्र नहीं है। गांव भिलाई स्टील प्लांट से करीब 20 किलोमीटर और दुर्ग जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके बावजूद बारिश में गांव तक पहुंचना चुनौती बन जाता है।

सेमरिया अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के धमधा जनपद पंचायत अंतर्गत बागडूमर ग्राम पंचायत का आश्रित गांव है। ग्रामीणों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग करते हुए कहा कि कम से कम श्मशान घाट तक ऐसा रास्ता जरूर बनाया जाना चाहिए, जहां किसी की अंतिम यात्रा को पानी और कीचड़ के बीच से न गुजरना पड़े।

ग्रामीणों की मांग- बारिश से पहले हो स्थायी समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश आते ही सड़क की समस्या सामने आती है। अस्थायी सुधार के बजाय पक्की सड़क और पानी निकासी की व्यवस्था की जरूरत है। उनका कहना है कि विकास का सबसे जरूरी पैमाना यह होना चाहिए कि गांव के लोगों को बीमारी, आपात स्थिति या अंतिम संस्कार जैसे समय में बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष न करना पड़े।