राजस्थान रॉयल्स के बिकने से मरने के बाद चमकी इस खिलाड़ी की किस्मत, सिर्फ 0.75% हिस्सेदारी, अब मिलेंगे 460 करोड़
दिवंगत शेन वॉर्न ने राजस्थान रॉयल्स में निवेश कर मास्टरस्ट्रोक खेला था। उनकी छोटी सी 0.75% हिस्सेदारी बढ़कर 460 करोड़ रुपये का जैकपॉट बन गई है। ये वॉर्न की एक ऐसी दूरदर्शिता थी, जिसका फायदा उनकी विरासत और उनके परिवार को 2022 में उनके अचानक गुजर जाने के चार साल बाद मिलने वाला है।
IPL 2026 की शुरुआत में अब एक हफ्ते से भी कम समय शेष है। इससे पहले राजस्थान रॉयल्स (RR) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) जैसी फ्रेंचाइजियों की रिकॉर्ड कीमतों पर बिक्री सुर्खियों में है। राजस्थान शुरुआती आठ फ्रेंचाइजियों में सबसे कम महंगी टीमों में से एक थी। उसे मंगलवार को सोमानी के नेतृत्व वाले अमेरिका स्थित एक ग्रुप ने 1.63 अरब डॉलर (लगभग 15,290 करोड़ रुपये) में खरीदा है। लेकिन, इस चौंकाने वाले सौदे के अलावा जिस बात ने लोगों का ध्यान सबसे ज्यादा खींचा, वह था दिवंगत शेन वॉर्न का मास्टरस्ट्रोक निवेश।
राजस्थान रॉयल्स में मिली 0.75% की मालिकाना हिस्सेदारी
ऑस्ट्रेलिया की 2006-07 एशेज जीत के बाद वॉर्न ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। दो साल बाद 2008 में आईपीएल के पहले सीजन में उनकी मैदान पर वापसी हुई। राजस्थान टीम में न सिर्फ एक खिलाड़ी के तौर पर, बल्कि वह कप्तान और मेंटर के तौर पर भी शामिल हुए।
फ्रेंचाइजी ने उन्हें क्रिकेट से जुड़े सभी कामों का पूरा नियंत्रण सौंप दिया था, जो उस समय एक बहुत ही अनोखा कदम था। इसके बदले में वॉर्न ने एक अनोखी डील हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें 657,000 डॉलर का भुगतान किया गया और जितने साल उन्होंने खेला हर साल के लिए उन्हें 0.75% की मालिकाना हिस्सेदारी दी गई।
भरोसे पर खरे उतरे शेन वॉर्न
'द हेराल्ड सन' को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरी डील का एक हिस्सा यह था… उन्होंने मुझसे कप्तान और कोच बनने के लिए कहा। साथ ही ये भी कहा कि मैं टीम को अपनी मर्जी से चला सकता हूं। मैं ही सब कुछ संभालने वाला अकेला व्यक्ति था। इस ऑस्ट्रेलियाई दिग्गज ने उस भरोसे को सही साबित कर दिखाया। उन्होंने एक अपेक्षाकृत कम चर्चित टीम को पहले ही सीजन में एक शानदार जीत दिलाई, जिसे शायद आईपीएल के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक माना जा सकता है।
कुल इक्विटी हिस्सेदारी बढ़कर 3% हो गई
शेन वॉर्न ने राजस्थान रॉयल्स के साथ चार सीजन बिताए, जिससे उनकी कुल इक्विटी हिस्सेदारी बढ़कर 3% हो गई। 2019 के एक इंटरव्यू वॉर्न ने कहा था कि 400 मिलियन यूएस डॉलर का तीन प्रतिशत ठीक है। शायद उन्हें यह भी अंदाजा था कि कि इसकी कीमत और बढ़ेगी। उनका वह अंदाजा बिल्कुल सही साबित हुआ है।
वॉर्न के हिस्से की कीमत अब 460 करोड़ रुपये
हाल ही में हुई बिक्री में राजस्थान की कीमत 1.63 बिलियन यूएस डॉलर आंकी गई है, जिससे वॉर्न के 3% हिस्से की कीमत अब लगभग 450–460 करोड़ रुपये हो गई है। उस समय यह एक काफी अलग तरह का निवेश फैसला था, जिस पर उन्हें यह जबरदस्त मुनाफा मिला है। ये सिर्फ एक बड़ा फ़ायदा ही नहीं, बल्कि वॉर्न का यह निवेश उनकी दूरदर्शिता का भी एक सबूत है। एक ऐसी दूरदर्शिता जिसका फायदा उनकी विरासत और उनके परिवार को 2022 में उनके अचानक गुजर जाने के चार साल बाद मिलने वाला है।
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