अस्पताल से छुट्टी मिलते ही राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक: बोले- बापू का रास्ता आज भी सबसे प्रभावी, हिंसा होती तो बिगड़ जाता आंदोलन

मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि, कहा- शांतिपूर्ण संघर्ष से मिली सफलता; शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जताई उम्मीद

अस्पताल से छुट्टी मिलते ही राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक: बोले- बापू का रास्ता आज भी सबसे प्रभावी, हिंसा होती तो बिगड़ जाता आंदोलन

गुरुग्राम/नई दिल्ली। सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सीधे दिल्ली स्थित राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बापू का सत्य और अहिंसा का मार्ग आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना एक सदी पहले था।

वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहा, इसलिए उसे व्यापक जनसमर्थन मिला और सकारात्मक परिणाम सामने आए। उनका मानना है कि यदि आंदोलन हिंसक हो जाता, तो पूरा मुद्दा भटक सकता था। इसी कारण उन्होंने निर्धारित समय से पहले अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें समझाने की कोशिश की थी कि वर्तमान समय में गांधीजी का तरीका प्रभावी नहीं रहेगा, लेकिन उनका अनुभव इसके विपरीत रहा। उनके अनुसार, अहिंसक आंदोलन सरकार से पहले आम जनता के दिल तक पहुंचता है और जनसमर्थन ही किसी भी लोकतांत्रिक संघर्ष की सबसे बड़ी ताकत होती है।

सोनम वांगचुक ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से गांधीजी के बताए मार्ग पर चलने की अपील करते हुए कहा कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय स्वयं कठिनाइयों का सामना करना ही सच्चे आंदोलन की पहचान है। उन्होंने कहा कि धैर्य और संयम से किया गया संघर्ष अंततः सबसे कठोर मन को भी बदल सकता है।

उन्होंने अपने आंदोलन में सहयोग देने वाले देशभर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से जुड़े हर व्यक्ति ने इस अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जाएंगे और जनता से किए गए वादों को पूरा किया जाएगा।

इससे पहले अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है और शरीर में धीरे-धीरे ताकत लौट रही है। उन्होंने कहा कि जैसे अनशन शुरू करने से पहले राजघाट जाकर बापू को नमन किया था, उसी परंपरा का पालन करते हुए अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी सबसे पहले राजघाट पहुंचे। यहां से वह अपने गृह प्रदेश लद्दाख के लिए रवाना होंगे।

वांगचुक ने कहा कि भविष्य में भी जनहित, शिक्षा और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।