OBC क्रीमी लेयर पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

11 मार्च के आदेश पर रोक लगाने से इनकार, सिर्फ वेतन आय के आधार पर क्रीमी लेयर तय नहीं होगी; 17 सितंबर को अगली सुनवाई

OBC क्रीमी लेयर पर केंद्र को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं

नई दिल्ली (ए)। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के क्रीमी लेयर निर्धारण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने 11 मार्च को दिए अपने आदेश पर रोक लगाने की केंद्र की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई के लिए 17 सितंबर 2026 की तारीख तय की है। तब तक 11 मार्च का आदेश प्रभावी रहेगा।

सिर्फ सैलरी को आधार मानना पर्याप्त नहीं

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान अपने पूर्व आदेश की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि OBC क्रीमी लेयर तय करने में केवल माता-पिता की वेतन आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए उनके पद का स्तर, सेवा श्रेणी और सामाजिक स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा।

अदालत के इस रुख का असर सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों और निजी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों पर भी पड़ सकता है। क्रीमी लेयर के निर्धारण की मौजूदा प्रक्रिया में केवल आय को आधार बनाने के बजाय अन्य संबंधित परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी होगा।

केंद्र ने बताई भर्ती प्रक्रिया में दिक्कत

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया कि आदेश को लागू करने में व्यावहारिक और प्रशासनिक परेशानियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि UPSC CSE 2025 के तहत 958 अभ्यर्थियों के सेवा आवंटन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यदि आदेश को पिछली तारीख से लागू किया गया तो मेरिट सूची, IAS-IPS समेत अन्य सेवाओं के कैडर आवंटन और प्रशिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

18 राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों पर भी असर की आशंका

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि मामले का प्रभाव केवल केंद्रीय सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहेगा। देश के 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केंद्र को अंतरिम राहत नहीं दी है। सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद अदालत मामले पर आगे विचार करेगी। अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।