बीएसपी लोहा चोरी कांड में भाजपा नेता भी गिरफ्त में, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से जुड़े तार
करोड़ों के संगठित घोटाले की जांच तेज; ट्रकों के जरिए लोहे की निकासी में भूमिका का आरोप, पार्टी ने 6 वर्ष के लिए किया निष्कासित
दुर्ग-भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) में करोड़ों रुपये के लोहा चोरी कांड की जांच अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गई है। पुलिस ने शनिवार को वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा मंडल कोषाध्यक्ष भास्कर मुदलियार को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि चोरी में इस्तेमाल किए गए ट्रकों का संबंध मुदलियार से जुड़ा पाया गया है। गिरफ्तारी के कुछ ही समय बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया।
ट्रांसपोर्ट कनेक्शन बना गिरफ्तारी का आधार
पुलिस के अनुसार बीएसपी परिसर से फ्लू डस्ट और फ्लाई ऐश की आड़ में लोहा बाहर निकालने के लिए जिन वाहनों का उपयोग किया जा रहा था, उनकी जांच के दौरान भास्कर मुदलियार से जुड़े ट्रकों की जानकारी सामने आई। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, इस गिरफ्तारी को लेकर पुलिस ने अब तक कोई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या तस्वीर सार्वजनिक नहीं की है।
17 आरोपियों तक पहुंची जांच
शुरुआत में इस मामले को केवल स्क्रैप चोरी का मामला माना गया था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह एक संगठित नेटवर्क के रूप में सामने आया। अब तक इस प्रकरण में बीएसपी के दो वरिष्ठ अधिकारियों सहित 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में अधिकारियों, ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और कारोबारियों की भूमिका भी सामने आई है।
भाजपा ने तत्काल की अनुशासनात्मक कार्रवाई
भिलाई जिला भाजपा अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने गिरफ्तारी के बाद भास्कर मुदलियार को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह वर्ष के लिए निष्कासित करने का आदेश जारी किया। पार्टी ने इसे अनुशासन और संगठन की गरिमा से जुड़ा मामला बताया है।
26 मई को हुआ था पूरे मामले का खुलासा
मामले का खुलासा 26 मई 2026 को तब हुआ था, जब पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने ग्राम अकलोरडीह खदानपारा स्थित एके ट्रेडर्स और हथखोज क्षेत्र के एक गोदाम में छापा मारा। वहां से फ्लू डस्ट के साथ लोहे की प्लेट, बीम और कटिंग सामग्री बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान लगभग 250 टन संदिग्ध लौह स्क्रैप, कई हाईवा, ट्रक, जेसीबी, हाईड्रा और अन्य मशीनें जब्त की गईं। जब्त सामग्री और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई।
बीएसपी के वरिष्ठ अधिकारी पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस पहले ही बीएसपी के तत्कालीन जनरल मैनेजर हिमांशु भूषण मलिक और असिस्टेंट जनरल मैनेजर मनोज कुमार देवांगन को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने प्लांट के भीतर से गिरोह को सहयोग उपलब्ध कराया और अवैध निकासी को संरक्षण दिया।
फ्लाई ऐश की आड़ में चलता था पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि बीएसपी से निकलने वाले फ्लू डस्ट और फ्लाई ऐश में आयरन स्क्रैप मिलाकर उसे प्लांट से बाहर भेजा जाता था। बाहर पहुंचने के बाद स्क्रैप को अलग कर विभिन्न गोदामों और कारोबारी ठिकानों पर जमा किया जाता था। पुलिस का मानना है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत शामिल थी।
जांच का दायरा और बढ़ने के संकेत
भास्कर मुदलियार की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, ठेकेदारों और अन्य कारोबारी संपर्कों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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