सड़क पर एक तरफ ट्रक, दूसरी तरफ मवेशी, बीच से निकल रहे लोग; दुर्ग में हादसों ने बढ़ाई चिंता
9 महीने में 184 लोगों की मौत, सितंबर में 6 जान गईं; औद्योगिक इलाकों से लेकर हाईवे तक सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग बनी चुनौती
दुर्ग-भिलाई।दुर्ग जिले में सड़क हादसों का एक बड़ा कारण केवल वाहन की रफ्तार नहीं, बल्कि सड़क की मौजूदा स्थिति भी बनती जा रही है। कहीं सड़क किनारे ट्रक और ट्रेलर खड़े हैं तो कहीं अचानक मवेशी वाहन के सामने आ जाते हैं। इन परिस्थितियों में वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाता। जनवरी से अगस्त तक जिले में 178 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई थी। सितंबर में अब तक 6 और मौतों के बाद यह संख्या 184 हो गई है।
हाल के हादसों में भी यही तस्वीर दिखाई दी है। 12 सितंबर को उरला बाईपास पर खड़े ट्रेलर से बाइक टकराने से एक युवक की मौत हुई। 15 सितंबर को झीट और मोतीपुर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान गई। इनमें एक हादसा गाय को बचाने के दौरान हुआ। इससे पहले कुम्हारी में सड़क किनारे खड़े ट्रैक्टर से स्कूटी टकराने की घटना में चार लोगों की मौत हो चुकी है।
हादसों की वजह सिर्फ तेज रफ्तार नहीं
सड़क दुर्घटनाओं की जांच में कई मामलों में चालक की गलती के साथ सड़क पर मौजूद बाधाएं भी सामने आती हैं। सड़क किनारे खड़े भारी वाहन अचानक सामने आने वाली बाधा बन जाते हैं। खासकर रात में बिना पर्याप्त रिफ्लेक्टर और पार्किंग लाइट के खड़े ट्रक-ट्रेलर दिखाई नहीं देते। ऐसे में पीछे से आने वाले वाहन चालक के पास ब्रेक लगाने या दिशा बदलने का समय कम रह जाता है।
औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े मार्गों पर समस्या ज्यादा दिखाई देती है। जेवरा-सिरसा, नंदिनी रोड और हथखोज के अलावा ट्रांसपोर्ट नगर-सिकोला क्षेत्र में मालवाहक वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान सड़क के हिस्से पर वाहन खड़े होने से यातायात का दबाव और बढ़ जाता है।
12 सितंबर की घटना ने फिर उठाया पार्किंग का सवाल
उरला बाईपास पर 12 सितंबर की रात करीब 8:35 बजे योगेश कुमार साहू बाइक से दुर्ग लौट रहे थे। टोल प्लाजा के पास उनकी बाइक सड़क पर खड़े ट्रेलर से टकरा गई। गंभीर रूप से घायल योगेश को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
पुलिस जांच में ट्रेलर के मुख्य सड़क पर खड़े होने की बात सामने आई। इसके बाद ट्रेलर चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। इस घटना ने फिर यह सवाल खड़ा किया कि व्यस्त बाईपास और हाईवे पर भारी वाहनों की पार्किंग के लिए निगरानी कितनी प्रभावी है।
मवेशियों से बचने में वाहन चालक खो रहे नियंत्रण
दुर्ग-भिलाई के कई हिस्सों में सड़क पर घूमते मवेशी भी वाहन चालकों के लिए अचानक सामने आने वाली चुनौती बने हुए हैं। 15 सितंबर को झीट-मोतीपुर क्षेत्र में हुए हादसे में बाइक के सामने गाय आ गई। उसे बचाने की कोशिश में दुर्घटना हुई और बाइक सवार की मौत हो गई।
ऐसी घटनाओं में वाहन चालक के पास निर्णय लेने के लिए कुछ ही सेकंड होते हैं। अचानक ब्रेक लगाने, दिशा बदलने या दूसरी लेन में जाने की कोशिश में वाहन असंतुलित हो सकता है। पीछे से आ रहे वाहनों की मौजूदगी स्थिति को और खतरनाक बना देती है।
कुम्हारी हादसे में चार लोगों की गई थी जान
16 जुलाई को कुम्हारी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़े ऑक्सीजन सिलेंडर लदे ट्रैक्टर से स्कूटी टकराई थी। इस दुर्घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और एक बच्चा घायल हुआ था। सड़क किनारे भारी वाहन खड़ा होने की यह घटना इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की रफ्तार सामान्य सड़कों की तुलना में अधिक रहती है।
पार्किंग के लिए जगह नहीं, सड़क पर खड़े हो रहे वाहन
जेवरा-सिरसा और नंदिनी रोड पर भारी वाहनों का दबाव अधिक है। हथखोज में औद्योगिक गतिविधियों के कारण ट्रकों की आवाजाही बनी रहती है। ट्रांसपोर्ट नगर और सिकोला में मालवाहक वाहनों की लोडिंग-अनलोडिंग के कारण सड़क पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
ऐसे में यदि निर्धारित पार्किंग व्यवस्था पर्याप्त नहीं है या उसका पालन नहीं कराया जाता, तो भारी वाहन सड़क के किनारे खड़े किए जाते हैं। दिन में चालक किसी तरह इन्हें देखकर निकल जाते हैं, लेकिन रात में बिना पर्याप्त रोशनी और रिफ्लेक्टर के खड़े वाहन ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं।
आंकड़े राहत भी देते हैं, लेकिन चुनौती कायम
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से अगस्त 2025 में सड़क दुर्घटनाओं में 247 लोगों की मौत हुई थी। 2026 की इसी अवधि में यह संख्या घटकर 178 रही। पुलिस का कहना है कि हेलमेट-सीट बेल्ट जांच, नशे में वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई और ब्लैक स्पॉट की निगरानी से हादसों पर नियंत्रण में मदद मिली है।
लेकिन सितंबर में लगातार हुई मौतों के बाद सड़क सुरक्षा की उन वजहों पर भी ध्यान देना जरूरी है, जो केवल वाहन चालक के व्यवहार से जुड़ी नहीं हैं। सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग, मवेशियों की समस्या, रात में चेतावनी संकेतों की कमी और व्यस्त मार्गों पर निगरानी जैसे मुद्दे दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
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