15 सितंबर की री-केवाईसी डेडलाइन से बढ़ी पेमेंट इंडस्ट्री की चिंता, RBI से मांगी मोहलत
लाखों छोटे दुकानदार और स्ट्रीट वेंडर सत्यापन से बाहर रह सकते हैं; डिजिटल भुगतान सेवा बाधित होने का खतरा
मर्चेंट्स के री-केवाईसी की 15 सितंबर की समयसीमा नजदीक आते ही पेमेंट इंडस्ट्री की चिंता बढ़ गई है। पेटीएम, फोनपे और गूगल पे जैसे प्लेटफॉर्म से जुड़े पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI से डेडलाइन आगे बढ़ाने की अपील की है। कंपनियों के मुताबिक छोटे दुकानदारों और अनौपचारिक कारोबारियों का एक हिस्सा तय समय में सत्यापन पूरा नहीं कर पाएगा।
नई दिल्ली (ए)। डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले देशभर के मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी की समयसीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI को पत्र भेजकर 15 सितंबर की डेडलाइन पर पुनर्विचार करने की अपील की है। कंपनियों का कहना है कि छोटे कारोबारियों का बड़ा नेटवर्क अभी सत्यापन की प्रक्रिया में है और तय समय तक पूरा बैकलॉग खत्म करना मुश्किल है।
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक करीब 80% मर्चेंट्स की री-केवाईसी समयसीमा तक पूरी हो सकती है। शेष 20% के लिए अतिरिक्त समय नहीं मिला तो उनके डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की क्षमता पर अस्थायी असर पड़ सकता है।
QR से भुगतान लेने वालों पर ज्यादा असर
देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में दुकानदार QR कोड, साउंडबॉक्स और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान लेते हैं। रेहड़ी-पटरी वाले कारोबारियों का भी इसमें बड़ा हिस्सा है। दस्तावेजों की उपलब्धता, पते के सत्यापन और फिजिकल वेरिफिकेशन जैसी वजहों से इन मर्चेंट्स तक पहुंचकर KYC पूरी करना आसान नहीं है।
नियमों का पालन करने में कंपनियों के सामने चुनौती
RBI ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए KYC से जुड़े नियमों को स्पष्ट और व्यवस्थित किया है। इसके तहत मर्चेंट्स की पहचान और कारोबारी जानकारी का सत्यापन जरूरी है। फिजिकल KYC के मामले में एग्रीगेटर के अपने कर्मचारियों की भूमिका अनिवार्य होने के कारण कंपनियों को बड़ी फील्ड टीम तैयार करनी पड़ी है।
डेडलाइन नहीं बढ़ी तो क्या होगा?
15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी नहीं होने वाले मर्चेंट्स के पेमेंट एक्सेप्टेंस या संबंधित मर्चेंट अकाउंट पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इससे छोटे दुकानदारों के रोजाना के डिजिटल लेनदेन में परेशानी आ सकती है। हालांकि पूरे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के कुल वॉल्यूम और वैल्यू पर इसका प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है।
एक साल से था नियमों को लागू करने का समय
RBI ने सितंबर 2025 में पेमेंट एग्रीगेटर्स से जुड़े अपडेटेड और कंसोलिडेटेड मास्टर डायरेक्शंस जारी किए थे। इनमें पेमेंट एग्रीगेटर्स को ऑनलाइन, फिजिकल और क्रॉस-बॉर्डर जैसी श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया। इंडस्ट्री के सामने अब मुख्य चुनौती नियमों के तहत बचे हुए मर्चेंट्स का समय पर सत्यापन पूरा करना है।
RBI से राहत की उम्मीद
पेमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि RBI जमीनी स्तर की चुनौतियों को देखते हुए डेडलाइन में राहत दे सकता है। एग्रीगेटर्स का तर्क है कि अतिरिक्त समय मिलने से बिना डिजिटल भुगतान व्यवस्था में अचानक व्यवधान पैदा किए शेष मर्चेंट्स की री-केवाईसी पूरी की जा सकेगी।नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले देशभर के मर्चेंट्स के लिए री-केवाईसी की समयसीमा बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। पेमेंट एग्रीगेटर्स ने RBI को पत्र भेजकर 15 सितंबर की डेडलाइन पर पुनर्विचार करने की अपील की है। कंपनियों का कहना है कि छोटे कारोबारियों का बड़ा नेटवर्क अभी सत्यापन की प्रक्रिया में है और तय समय तक पूरा बैकलॉग खत्म करना मुश्किल है।
इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक करीब 80% मर्चेंट्स की री-केवाईसी समयसीमा तक पूरी हो सकती है। शेष 20% के लिए अतिरिक्त समय नहीं मिला तो उनके डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की क्षमता पर अस्थायी असर पड़ सकता है।
QR से भुगतान लेने वालों पर ज्यादा असर
देश के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में दुकानदार QR कोड, साउंडबॉक्स और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान लेते हैं। रेहड़ी-पटरी वाले कारोबारियों का भी इसमें बड़ा हिस्सा है। दस्तावेजों की उपलब्धता, पते के सत्यापन और फिजिकल वेरिफिकेशन जैसी वजहों से इन मर्चेंट्स तक पहुंचकर KYC पूरी करना आसान नहीं है।
नियमों का पालन करने में कंपनियों के सामने चुनौती
RBI ने पेमेंट एग्रीगेटर्स के लिए KYC से जुड़े नियमों को स्पष्ट और व्यवस्थित किया है। इसके तहत मर्चेंट्स की पहचान और कारोबारी जानकारी का सत्यापन जरूरी है। फिजिकल KYC के मामले में एग्रीगेटर के अपने कर्मचारियों की भूमिका अनिवार्य होने के कारण कंपनियों को बड़ी फील्ड टीम तैयार करनी पड़ी है।
डेडलाइन नहीं बढ़ी तो क्या होगा?
15 सितंबर तक री-केवाईसी पूरी नहीं होने वाले मर्चेंट्स के पेमेंट एक्सेप्टेंस या संबंधित मर्चेंट अकाउंट पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इससे छोटे दुकानदारों के रोजाना के डिजिटल लेनदेन में परेशानी आ सकती है। हालांकि पूरे डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के कुल वॉल्यूम और वैल्यू पर इसका प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है।
एक साल से था नियमों को लागू करने का समय
RBI ने सितंबर 2025 में पेमेंट एग्रीगेटर्स से जुड़े अपडेटेड और कंसोलिडेटेड मास्टर डायरेक्शंस जारी किए थे। इनमें पेमेंट एग्रीगेटर्स को ऑनलाइन, फिजिकल और क्रॉस-बॉर्डर जैसी श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया। इंडस्ट्री के सामने अब मुख्य चुनौती नियमों के तहत बचे हुए मर्चेंट्स का समय पर सत्यापन पूरा करना है।
RBI से राहत की उम्मीद
पेमेंट इंडस्ट्री को उम्मीद है कि RBI जमीनी स्तर की चुनौतियों को देखते हुए डेडलाइन में राहत दे सकता है। एग्रीगेटर्स का तर्क है कि अतिरिक्त समय मिलने से बिना डिजिटल भुगतान व्यवस्था में अचानक व्यवधान पैदा किए शेष मर्चेंट्स की री-केवाईसी पूरी की जा सकेगी।
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