लोक संस्कृति के रंग में रंगा भिलाई-3, 40 वार्डों में दस दिन चला भोजली उत्सव संपन्न
बाजार चौक में हुआ निगम स्तरीय समापन समारोह; पारंपरिक वेशभूषा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, उत्कृष्ट आयोजन करने वाली समितियां हुईं सम्मानित
भिलाई-3। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा और कृषि संस्कृति की पहचान माने जाने वाले भोजली पर्व का भिलाई-चरोदा नगर निगम क्षेत्र में दस दिनों तक चले आयोजन के बाद सोमवार को समापन हो गया। 22 अगस्त से निगम के 40 वार्डों में चल रहे भोजली उत्सव का अंतिम कार्यक्रम भिलाई-3 के बाजार चौक में आयोजित किया गया। समापन समारोह में बड़ी संख्या में महिलाएं और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों ने आयोजन को छत्तीसगढ़ी रंग से सराबोर कर दिया।
40 वार्डों में हुए अलग-अलग आयोजन
भोजली उत्सव को लेकर नगर निगम क्षेत्र के सभी 40 वार्डों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। महिलाओं और स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीके से भोजली की पूजा-अर्चना कर लोक परंपरा को जीवंत रखा। अलग-अलग वार्डों में आयोजित कार्यक्रमों में लोगों ने उत्साह के साथ भागीदारी की।
आयोजकों के मुताबिक, भोजली पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी और प्रकृति के साथ लोगों के जुड़ाव को भी दर्शाता है। इसी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से निगम क्षेत्र में सामूहिक स्तर पर उत्सव आयोजित किया गया।
समापन समारोह में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक
भिलाई-3 के बाजार चौक में आयोजित समापन समारोह में लोक संस्कृति पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम स्थल पर पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं महिलाओं ने आयोजन की रौनक बढ़ाई। लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की परंपराओं और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा कि आधुनिकता के दौर में स्थानीय लोक परंपराओं का संरक्षण जरूरी है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपरा और कृषि जीवन से जुड़ी मान्यताओं की जानकारी मिलती है।
बेहतर आयोजन करने वालों को मिला सम्मान
उत्सव के दौरान बेहतर प्रदर्शन और उत्कृष्ट आयोजन करने वाले प्रतिभागियों एवं समितियों को समापन समारोह में पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। आयोजन से जुड़े लोगों ने बताया कि विभिन्न वार्डों में लोगों की सक्रिय भागीदारी रही और सामूहिक रूप से भोजली पर्व मनाया गया।
राकेश पांडे रहे मुख्य अतिथि
समापन समारोह में छत्तीसगढ़ शासन के खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ विभिन्न जनप्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी और स्थानीय कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
अतिथियों ने भोजली जैसे पारंपरिक पर्वों को संरक्षित करने और उन्हें व्यापक स्तर पर आयोजित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि लोक संस्कृति किसी भी क्षेत्र की पहचान होती है और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कृषि और मिट्टी से जुड़ी परंपरा का प्रतीक है भोजली
भोजली पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि और लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसमें प्रकृति, अच्छी फसल और समृद्धि के प्रति लोगों की आस्था दिखाई देती है। यही कारण है कि गांवों से लेकर शहरों तक भोजली आज भी लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती है।
भिलाई-चरोदा निगम क्षेत्र में दस दिनों तक चले इस आयोजन का समापन भले ही हो गया, लेकिन आयोजन के जरिए लोक संस्कृति को सहेजने और नई पीढ़ी को उससे जोड़ने का संदेश दिया गया।
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