चार निगमों में चुनावी तैयारी तेज, महिला आरक्षित सीटों पर सक्रिय चेहरों की तलाश
बीरगांव में महिला और रिसाली में एससी महिला महापौर के लिए भी दावेदारों की छंटनी, 230 में 76 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित
रायपुर। दिसंबर में प्रस्तावित चार नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को गति देना शुरू कर दिया है। बीरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब टिकट के दावेदारों पर मंथन शुरू हो गया है। सबसे अधिक नजर महिला आरक्षित वार्डों पर है, क्योंकि इस बार उम्मीदवार चयन में सिर्फ आरक्षण की पात्रता पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। दलों को ऐसे महिला चेहरों की तलाश है, जिनकी अपनी राजनीतिक पहचान और क्षेत्र में मजबूत पकड़ हो।
नगरीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा कामकाज संचालित किए जाने की व्यवस्था पर शासन ने रोक लगाने की दिशा में स्पष्ट नियम बनाए हैं। अगस्त में जारी अधिसूचना के तहत निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के करीबी रिश्तेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में नामित नहीं किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था के बाद राजनीतिक दलों के लिए महिला प्रत्याशियों का चयन पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पार्टी के सामने अब ऐसे उम्मीदवार चुनने की जरूरत होगी, जो चुनाव जीतने के बाद खुद वार्ड की जिम्मेदारी संभालें और जनता से सीधे संवाद बनाए रखें।
परिवार की पहचान नहीं, अपना जनाधार बनेगा आधार
महिला आरक्षित सीटों पर टिकट के लिए उम्मीदवार की संगठन में सक्रियता, स्थानीय स्तर पर पहचान, कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क और मतदाताओं के बीच प्रभाव जैसे पहलुओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। पति, पिता या परिवार के किसी अन्य सदस्य की राजनीतिक सक्रियता के सहारे टिकट हासिल करने वाले दावेदारों के बजाय अपनी राजनीतिक जमीन तैयार कर चुकी महिलाओं को आगे बढ़ाने पर दलों का जोर रह सकता है।
भाजपा और कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों के तहत स्थानीय स्तर पर गतिविधियां बढ़ा दी हैं। निकायवार प्रभारियों की जिम्मेदारी तय करने के साथ संभावित प्रत्याशियों से व्यक्तिगत चर्चा और स्थानीय पदाधिकारियों से उनके बारे में जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद दोनों दलों में दावेदारों की संख्या और उनके राजनीतिक प्रभाव का आकलन भी किया जाएगा।
दो निगमों में महापौर पद के आरक्षण से बढ़ी चुनौती
बीरगांव नगर निगम में महापौर का पद महिला के लिए आरक्षित है। इसलिए यहां राजनीतिक दलों को पार्षद पद के साथ महापौर पद के लिए भी मजबूत महिला दावेदार सामने लानी होगी। रिसाली में महापौर पद एससी महिला के लिए आरक्षित होने से यहां एससी वर्ग की महिला नेताओं के बीच मुकाबला और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। पार्टी संगठन में सक्रियता और क्षेत्रीय जनाधार रखने वाली दावेदारों को बढ़त मिलने की संभावना है।
भिलाई में सबसे अधिक 70 वार्ड
चारों निगमों में कुल 230 वार्ड हैं। इनमें 76 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भिलाई नगर निगम में 70 वार्ड हैं, जिनमें 23 ओबीसी, 9 एससी, 3 एसटी और 35 सामान्य वार्ड शामिल हैं।
रिसाली नगर निगम के 40 वार्डों में 8 ओबीसी, 7 एससी, 3 एसटी और 22 सामान्य वार्ड हैं। भिलाई-चरौदा के 40 वार्डों में 11 ओबीसी, 6 एससी, 2 एसटी और 21 सामान्य वार्ड हैं। बीरगांव में 40 वार्डों में 13 ओबीसी, 5 एससी, 2 एसटी और 20 सामान्य वार्ड हैं।
आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब चुनावी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। महिला आरक्षित वार्डों में दावेदारों की संख्या बढ़ने के साथ पार्टियों को जिताऊ उम्मीदवार चुनने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इस बार टिकट पाने वाली महिलाओं से केवल चुनाव जीतने की उम्मीद नहीं होगी, बल्कि निकाय में अपनी भूमिका स्वतंत्र रूप से निभाने की अपेक्षा भी रहेगी।
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