जहां था नक्सलियों का दबदबा, वहां अब सुरक्षा कैंप और तिरंगा, दुर्गम अबूझमाड़ में विकास की दस्तक

जहां था नक्सलियों का दबदबा, वहां अब सुरक्षा कैंप और तिरंगा, दुर्गम अबूझमाड़ में विकास की दस्तक

नारायणपुर पुलिस ने जनसुविधा कैंप स्थापित किया। दशकों से नक्सल प्रभावित इलाके में अब सुरक्षा और विकास की नई शुरुआत हुई है, जिससे स्थानीय लोगों में विश्वास बढ़ा है।

दशकों तक नक्सलियों के कब्जे में रहे अबूझमाड़ के दुर्गम कुमनार क्षेत्र में अब सुरक्षा और विकास की नई शुरुआत हुई है। नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2026 का आठवां और अंतिम सुरक्षा एवं जनसुविधा कैंप स्थापित कर नक्सल प्रभावित इलाके में निर्णायक बढ़त हासिल की है। इससे अब क्षेत्र में आम नागरिक निर्भीक होकर तिरंगा फहरा सकेंगे।

अबूझमाड़ में नक्सलियों की पकड़

कुमनार वही इलाका है जिसे नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। यहां सुरक्षा बलों ने पहले कुख्यात नक्सली बसवा राजू समेत कई शीर्ष उग्रवादियों को मार गिराया था। अब स्थायी कैंप की स्थापना से स्पष्ट संकेत मिला है कि अबूझमाड़ में नक्सलियों की पकड़ कमजोर हो रही है।

इस अभियान में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फाइटर्स और आईटीबीपी की विभिन्न बटालियनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुमनार में अंतिम कैंप की स्थापना को अबूझमाड़ में सुरक्षा, विकास और विश्वास की बड़ी जीत माना जा रहा है।

सडक़ कनेक्टिविटी से बढ़ेगा विकास

ओरछा से कुमनार होते हुए भैरमगढ़ (बीजापुर) तक सडक़ संपर्क स्थापित किया गया है। पहले यह इलाका प्रशासन की पहुंच से लगभग दूर था, लेकिन अब आवागमन आसान होने से विकास कार्यों को गति मिलेगी।

माड़ बचाओ अभियान’ बना गेमचेंजर

नक्सल मुक्त बस्तर के लक्ष्य के तहत चलाए जा रहे इस अभियान से लगातार नए कैंप स्थापित हो रहे हैं। कुमनार कैंप से कांदुलनार-ओरछा-एडजुम-इडवाया-आदेर-कुडमेल-बोटेर-दिवालूर मार्ग पर सडक़ और विकास कार्यों को सुरक्षा मिलेगी।

ग्रामीणों में उत्साह

कैंप खुलने से लेकवाड़ा, नेडअट्टे, डोडूम, ईदवाड़ा और आंगमेटा जैसे गांवों में सडक़, स्वास्थ्य, शिक्षा और मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधाएं पहुंचने की उम्मीद बढ़ी है। 2025 से अब तक अबूझमाड़ क्षेत्र में 35 से अधिक कैंप स्थापित किए जा चुके हैं। 2026 में जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो, हच्चेकोटी, आदनार, बोटेर, दिवालूर और कुमनार में नए कैंप खोले गए हैं।

अबूझमाड़ मेें सबसे बड़ी चुनौती रही

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा कैंप स्थापित करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इन कैंपों के माध्यम से स्थानीय लोगों तक सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। जनसुविधा कैंप इसी दिशा में एक प्रयास हैं, जहां सुरक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, राशन, शिक्षा और अन्य सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

अबूझमाड़ जैसे इलाकों में विश्वास बहाली सबसे बड़ी चुनौती रही है। दशकों तक नक्सल प्रभाव में रहने के कारण स्थानीय समुदाय और प्रशासन के बीच दूरी बनी रही। ऐसे में नए कैंपों की स्थापना से न केवल सुरक्षा मजबूत होती है, बल्कि सरकार और ग्रामीणों के बीच भरोसा भी धीरे-धीरे बढ़ता है।