झीरम का फैसला आया, मगर साजिश पर सवाल बाकी
NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी माना; कांग्रेस ने कहा- बड़े साजिशकर्ता अब भी बाहर, बचाव पक्ष हाईकोर्ट जाएगा
जगदलपुर। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में शनिवार को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया। करीब 13 साल से चल रहे इस मामले की सुनवाई में 11 आरोपी थे, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। अब अदालत 16 सितंबर को दोषियों को दी जाने वाली सजा पर फैसला सुनाएगी।
अदालत के फैसले से झीरम घाटी कांड की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव जरूर आया है, लेकिन इसके साथ ही इस हमले की साजिश और कथित मास्टरमाइंड को लेकर राजनीतिक सवाल भी फिर उठ खड़े हुए हैं।
कांग्रेस ने कहा- पूरी साजिश सामने नहीं आई
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं और जवानों की हत्या महज नक्सली हमला नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक साजिश थी। उनका कहना है कि जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराया गया है, वे हमले के पीछे के बड़े नक्सली नेतृत्व का हिस्सा नहीं थे। कांग्रेस ने लंबे समय से हमले के पीछे के कथित साजिशकर्ताओं तक पहुंचने की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी NIA की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जांच में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त प्रयास नहीं किया गया। उनका तर्क था कि जब साजिश की पूरी कड़ी की जांच नहीं हुई तो अदालत के सामने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला आ सकता है।
महेंद्र कर्मा की बेटी ने भी जताई नाराजगी
कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा ने फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि घटना के समय मौजूद लोगों से अपेक्षित पूछताछ नहीं की गई। उनका आरोप है कि न्याय की प्रक्रिया केवल औपचारिकता तक सीमित रह गई और कई अहम सवालों के जवाब अब भी बाकी हैं।
101 गवाहों के बयान, 13 साल बाद दोषसिद्धि
मामले में अभियोजन पक्ष ने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। 10 अगस्त को अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। शनिवार को अदालत ने सभी 10 जीवित आरोपियों को दोषी करार दिया।
बचाव पक्ष हाईकोर्ट जाएगा
फैसले के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने कहा कि वे निर्णय से असंतुष्ट हैं और हाईकोर्ट का रुख करेंगे। इस तरह मामले की कानूनी लड़ाई अब आगे भी जारी रहने के संकेत हैं।
हमले में 27 लोगों की गई थी जान
NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस हमले में 27 लोगों की मौत हुई, जिनमें 10 पुलिसकर्मी शामिल थे, जबकि 38 लोग घायल हुए थे।
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