क्यों अलग नजर आती है मोदी की नेतृत्व शैली, 76वें जन्मदिन पर समझिए व्यक्तित्व के 5 पहलू

राजनीतिक उतार-चढ़ाव से लेकर बड़े फैसलों तक, वापसी की क्षमता, निर्णय पर नियंत्रण, अनुशासन और संवाद का अलग तरीका

क्यों अलग नजर आती है मोदी की नेतृत्व शैली, 76वें जन्मदिन पर समझिए व्यक्तित्व के 5 पहलू

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन संगठन से शुरू होकर मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। 17 सितंबर 1950 को जन्मे मोदी अब 76 वर्ष के हो गए हैं। इतने लंबे राजनीतिक सफर में उनकी कार्यशैली के कई पहलू लगातार चर्चा में रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं—विपरीत परिस्थितियों में खुद को फिर स्थापित करना, महत्वपूर्ण फैसलों में सीधे सामने रहना, सार्वजनिक मंच पर सहजता, समय और दिनचर्या को लेकर अनुशासन तथा अलग-अलग वर्गों तक अलग अंदाज में संदेश पहुंचाना।

संगठन से सत्ता के केंद्र तक पहुंचने का सफर

मोदी का राजनीतिक सफर अचानक सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाला सफर नहीं रहा। गुजरात संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भेजा गया। दिल्ली में भाजपा संगठन की जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने कई राज्यों में पार्टी के काम को संभाला। वर्ष 2001 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने। प्रधानमंत्री की आधिकारिक जीवनी के अनुसार, सितंबर 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से फोन मिलने के बाद उनके राजनीतिक जीवन में शासन का नया अध्याय शुरू हुआ।

इस सफर को मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखें तो कमबैक और रेजिलिएंस महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं। व्यक्ति के सामने परिस्थिति अनुकूल न हो, तब भी वह अपनी भूमिका, रणनीति या लक्ष्य को नए तरीके से व्यवस्थित करता है। मोदी के राजनीतिक जीवन में दिल्ली जाने और बाद में गुजरात लौटने की घटनाएं इसी तरह के बदलाव का उदाहरण मानी जाती हैं।

बड़े फैसलों में खुद आगे रहने की प्रवृत्ति

मोदी की राजनीति में बड़े निर्णयों को लेकर उनका सीधे सामने रहना एक प्रमुख विशेषता रही है। नोटबंदी से लेकर कोरोना काल के लॉकडाउन तक कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा उन्होंने स्वयं की। समर्थकों के लिए यह निर्णायक नेतृत्व का संकेत रहा है, जबकि आलोचक कुछ फैसलों के परिणामों और क्रियान्वयन पर अलग-अलग सवाल उठाते रहे हैं।

मनोविज्ञान में जिम्मेदारी का बोध और नियंत्रण की भावना व्यक्ति के निर्णय व्यवहार से जुड़े विषय हैं। लेकिन किसी नेता की सार्वजनिक गतिविधियों के आधार पर उसके व्यक्तिगत मनोविज्ञान का अंतिम निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।

लोगों के बीच सहज रहने की शैली

प्रधानमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोगों से सीधे संवाद और अनौपचारिक बातचीत के अनेक उदाहरण दिखाई देते हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वे कई बार नेताओं और तकनीकी क्षेत्र के प्रमुखों के साथ व्यक्तिगत संपर्क करते नजर आते हैं।

व्यक्तित्व मनोविज्ञान में सोशल बोल्डनेस उस प्रवृत्ति को कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति नए सामाजिक माहौल में अपेक्षाकृत सहज होकर अपनी बात रखता है। हालांकि किसी नेता की सार्वजनिक छवि और वास्तविक निजी व्यक्तित्व को एक ही मान लेना उचित नहीं है।

दिनचर्या और अनुशासन पर जोर

मोदी की कार्यशैली का एक प्रमुख सार्वजनिक पहलू योग और नियमित दिनचर्या है। प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वे योग और प्राणायाम को अपनी जीवनशैली से जोड़ते हैं। उन्होंने अपने फिटनेस अभ्यास का वीडियो भी सार्वजनिक किया है।

वे काम पूरा करने को मानसिक तनाव कम करने से भी जोड़ चुके हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि अधूरा काम उन्हें अधिक परेशान करता है और इसलिए वे सामने आए काम को पूरा करने की आदत पर जोर देते हैं।

मनोविज्ञान में अनुशासन को केवल सख्त दिनचर्या नहीं माना जाता। इसमें लक्ष्य तय करना, प्राथमिकताएं निर्धारित करना और तत्काल आकर्षण के बावजूद तय योजना पर टिके रहना भी शामिल है।

संदेश के अनुसार भाषा और तरीका बदलना

मोदी की संवाद शैली में एक और महत्वपूर्ण पहलू है—श्रोता के अनुसार संदेश को ढालना। घरेलू राजनीतिक भाषणों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल करने वाले मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अंग्रेजी का प्रयोग करते हैं। इसका उद्देश्य अक्सर अलग-अलग दर्शकों तक संदेश को सीधे पहुंचाना होता है।

प्रधानमंत्री की आधिकारिक प्रोफाइल में उनके सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को भी उनकी सार्वजनिक संवाद शैली का हिस्सा बताया गया है।

संचार के लिहाज से इसे ऑडियंस-सेंट्रिक कम्युनिकेशन कहा जा सकता है, जिसमें वक्ता यह तय करता है कि सामने मौजूद लोगों के लिए कौन-सी भाषा, उदाहरण और संदेश अधिक स्पष्ट होगा।

76 की उम्र में भी सक्रिय सार्वजनिक भूमिका

नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था। 2026 में वे 76 वर्ष के हुए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी सार्वजनिक गतिविधियां, यात्राएं, बैठकें और राजनीतिक कार्यक्रम जारी हैं। उनकी कार्यशैली को समझने के लिए इसलिए केवल किसी एक घटना के बजाय दशकों के सार्वजनिक रिकॉर्ड को देखना अधिक उपयोगी है।

इन पांच पहलुओं—विपरीत परिस्थितियों से उबरना, निर्णय की जिम्मेदारी, सामाजिक आत्मविश्वास, आत्म-अनुशासन और लक्षित संवाद—को मोदी की सार्वजनिक कार्यशैली के संदर्भ में देखा जा सकता है। लेकिन इन्हें किसी व्यक्ति का चिकित्सकीय या निश्चित मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन नहीं माना जाना चाहिए।