छत्तीसगढ़ हिरासत मृत्यु मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, CBI जांच के आदेश

राज्य सरकार को चार सप्ताह में मृतक के परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश; अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

छत्तीसगढ़ हिरासत मृत्यु मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, CBI जांच के आदेश

रायपुर। बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र में 34 वर्षीय युवक श्रवण सूर्यवंशी की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया है कि मृतक के परिवार को चार सप्ताह के भीतर ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा दिया जाए। साथ ही कहा कि जांच में यदि किसी अधिकारी की भूमिका हिरासत में हुई हिंसा से जुड़ी पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

FIR में ढाई साल की देरी पर कोर्ट की नाराजगी

अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, श्रवण सूर्यवंशी को 18 जनवरी 2024 को कथित रूप से कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। तीन दिन बाद 21 जनवरी 2024 को अस्पताल में उसकी मौत हो गई। मामले में प्राथमिकी 30 जुलाई 2026 को दर्ज की गई, यानी घटना के लगभग ढाई वर्ष बाद। सुप्रीम कोर्ट ने इस देरी को गंभीर मानते हुए राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

न्यायिक जांच में सिर पर गंभीर चोट का उल्लेख

मृत्यु के बाद जेल अधीक्षक ने न्यायिक जांच की अनुशंसा की थी। जुलाई 2024 में प्रस्तुत न्यायिक मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट में कहा गया कि श्रवण की मृत्यु सिर पर किसी कठोर वस्तु से लगी चोट के कारण उत्पन्न जटिलताओं से हुई। अदालत ने कहा कि इस रिपोर्ट के बावजूद उचित कार्रवाई न होना चिंताजनक है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिवार पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

मृतक की पत्नी और दो बेटियों ने निष्पक्ष जांच और ₹50 लाख मुआवजे की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने परिवार को ₹1 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन स्वतंत्र जांच या FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।

अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CBI केवल हिरासत में हुई मौत की परिस्थितियों की जांच नहीं करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की। अदालत ने CBI को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।

एक सप्ताह में CBI को सौंपना होगा रिकॉर्ड

अदालत ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि मामले से संबंधित सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर विशेष दूत के माध्यम से CBI निदेशक को सौंपे जाएं। जांच की प्रगति रिपोर्ट 13 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

चार सप्ताह में मुआवजा राशि का भुगतान

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि श्रवण सूर्यवंशी अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसकी मृत्यु हिरासत के दौरान हुई कथित हिंसा से जुड़ी है। इसी आधार पर राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर ₹25 लाख की अंतरिम राहत राशि परिवार के बैंक खाते में जमा कराने का आदेश दिया गया है। अंतिम मुआवजे का निर्धारण याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान किया जाएगा।