प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली में मेट्रो सेवा और आवाजाही सामान्य रखने के निर्देश; CJP के तीन नेता 23 घंटे बाद रिहा, शांति बनाए रखने का मुचलका भरा

प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, केंद्र से मांगा जवाब

  नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशन बंद करने और लोगों को हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि राजधानी में नागरिकों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए और कानून के अनुरूप ही हिरासत की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने बंद मेट्रो स्टेशनों का नक्शा भी तलब किया है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले CJP के तीन नेताओं को 23 घंटे बाद रिहा कर दिया गया।

 

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रविवार को सुनवाई हुई। दो याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर उनके शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को प्रभावित किया गया और 9 अक्टूबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया।

जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की विशेष पीठ ने केंद्र और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए मंगलवार तक अंतरिम जवाब दाखिल करने को कहा। अधिकारियों से हलफनामा देकर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

सुनवाई में अदालत ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से प्रदर्शन के दौरान बंद किए गए मेट्रो स्टेशनों का नक्शा मांगा। कोर्ट ने सवाल किया कि यदि बीच के स्टेशन बंद कर दिए जाएं, जबकि रूट के दोनों छोर के स्टेशन खुले हों, तो यात्रियों को कितनी परेशानी होगी। सरकार की ओर से बताया गया कि शनिवार रात 10 बजे तक सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए थे और इंटरनेट सेवा भी बहाल हो चुकी थी।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट परिसर और आसपास धारा 163 के प्रतिबंधों से संबंधित नोटिस हटाने के निर्देश भी दिए, यदि वे अब तक लगे हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि अदालतों में आने-जाने वाले लोगों को किसी तरह की आशंका नहीं होनी चाहिए। साथ ही, शांतिपूर्ण और बिना हथियार के प्रदर्शन कर रहे लोगों को कानून में तय प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लेने का निर्देश दिया।

इस मामले में CJP नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह करीब 10 बजे रिहा कर दिया गया। तीनों को दिल्ली कैंट स्थित कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया था। उन्हें एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त पर रिहाई मिली। तीनों ने 50 हजार रुपये का मुचलका भरा। शर्तों का उल्लंघन होने पर मुचलके की राशि जब्त की जा सकती है, लेकिन यह शर्त उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से स्वतः नहीं रोकती।

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को प्रदर्शन किया था। इस दौरान करीब 7 हजार लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने कई निहत्थे लोगों को पकड़ा, उनके साथ मारपीट की और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में लिया और उनके साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि मामला केवल वकीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने बैरिकेड हटाने और लोगों की आवाजाही तत्काल सामान्य करने की मांग की।

याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्बल, मेनका गुरुस्वामी, संजय हेगड़े और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ अदालत में उपस्थित हुए। अब केंद्र और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।