मानसून का कहर: उत्तराखंड में संपर्क टूटा, छत्तीसगढ़ में नदी ने 3 छात्रों को बहाया; बिहार में 47 लाख लोग बेहाल

पिथौरागढ़ का नया पुल पानी में समाया, यूपी के 26 जिले भी बाढ़ की चपेट में; एमपी में 15 और राजस्थान के 29 जिलों में बारिश की चेतावनी

मानसून का कहर: उत्तराखंड में संपर्क टूटा, छत्तीसगढ़ में नदी ने 3 छात्रों को बहाया; बिहार में 47 लाख लोग बेहाल

नई दिल्ली (ए) देश के कई राज्यों में मानसून अब परेशानी का सबब बनता जा रहा है। कहीं नदियां उफान पर हैं तो कहीं तेज बारिश से सड़क और संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भारी जलप्रवाह ने 170 फीट लंबे बैली ब्रिज को बहा दिया। छत्तीसगढ़ में हसदेव नदी के तेज बहाव में तीन कॉलेज छात्र लापता हो गए। वहीं बिहार में बाढ़ का दायरा बढ़ने से 15 जिलों के 47 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।

पिथौरागढ़ में कुलागाड़ नाले पर बनाया गया बैली ब्रिज महज कुछ दिनों में ही तेज बहाव की भेंट चढ़ गया। पुल का निर्माण 27 अगस्त को हुआ था। इससे पहले 18 अगस्त को चट्टान गिरने से पुराना पुल टूट गया था। नए पुल के बहने के बाद चीन सीमा से सटी व्यास, दारमा और चौदांस घाटियों का संपर्क बाधित हो गया है।

जांजगीर-चांपा में हादसा उस समय हुआ, जब बिलासपुर के चौकसे कॉलेज के छात्र-छात्राओं का दल देवरी गांव में पिकनिक के लिए पहुंचा था। नदी किनारे सेल्फी लेने के दौरान एक छात्र का संतुलन बिगड़ा और वह पानी में गिर गया। उसे बचाने के लिए आगे बढ़े दो अन्य छात्र भी तेज धारा की चपेट में आ गए। तीनों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और खोजबीन जारी है।

बिहार में नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में गंगा सहित कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। 15 जिलों में बाढ़ से 47 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। उत्तर प्रदेश में भी 26 जिलों में बाढ़ का असर है। करीब 4 लाख आबादी प्रभावित होने के साथ 21 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कानपुर और उन्नाव में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब है। नदी के किनारे बसे गांवों में पानी कई जगह 10 फीट तक पहुंच गया है।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में बारिश का दौर

मध्य प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय होने से 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। राजस्थान के 29 जिलों में भी बारिश की संभावना जताई गई है। शुक्रवार को अलवर, सवाई माधोपुर और दौसा में तेज बारिश के कारण कई सड़कों पर पानी भर गया था। भोपाल में बारिश के दौरान दृश्यता 100 मीटर से नीचे चली गई, जबकि दमोह के निचले हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई।