राजिम कुंभ में जूना अखाड़ा की पंगत, जयकारों से गूंजा पंडाल
राजिम कुंभ कल्प के पावन अवसर पर जूना अखाड़ा में आयोजित भोजन प्रसादी की पंगत ने श्रद्धालुओं के मन को गहराई तक स्पर्श किया।
राजिम कुंभ कल्प के पावन अवसर पर जूना अखाड़ा में आयोजित भोजन प्रसादी की पंगत ने श्रद्धालुओं के मन को गहराई तक स्पर्श किया। लंबी कतारों में विराजमान संत-महात्माओं का दृश्य ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो अनुशासन स्वयं आकार लेकर बैठ गया हो। केसरिया वस्त्रों से सजी पंगत में साधु-संत पूरी मर्यादा और संयम के साथ प्रसादी की प्रतीक्षा करते नजर आए।
प्रसादी वितरण से पूर्व जब संतों ने एक स्वर में जयकारा लगाया तो पूरा पंडाल भक्तिमय ऊर्जा से गूंज उठा। वह क्षण केवल भोजन ग्रहण करने का नहीं, बल्कि परंपरा, समर्पण और साधना के सामूहिक भाव का प्रतीक बन गया। पंगत में बैठे संतों की शांत मुद्रा, परस्पर सम्मान और व्यवस्था के प्रति सजगता ने यह संदेश दिया कि साधु समाज केवल अध्यात्म का ही नहीं, बल्कि अनुशासन और आदर्श जीवन शैली का भी जीवंत उदाहरण है।
जूना अखाड़ा की यह प्रसादी पंगत केवल भोजन का आयोजन नहीं थी, बल्कि वह दृश्य था जिसने यह अहसास कराया कि जब समाज संयम और संस्कार के साथ आगे बढ़ता है, तब हर आयोजन एक प्रेरणा बन जाता है। जूना अखाड़ा की पंगत ने साबित कर दिया- जहां साधना है, वहां अनुशासन है; और जहां अनुशासन है, वहीं सच्ची संस्कृति जीवित है
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